स्वच्छता मिशन के दावों की खुली पोल आधा-अधूरा शौचालय
झाड़-झंखाड़ और कूड़े से घिरा, सेवा संकल्प दिवस में पहुंच रहीं महिलाओं को हो रही परेशानी
महिला सम्मान के दावे, लेकिन बुनियादी सुविधा नदारद
शौचालय की दीवार पर पहचान तक नहीं, जिम्मेदारों की अनदेखी पर उठे सवाल
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश/Etv News 24/संवाददाता वागीश
बलदीराय / धनपतगंज विकासखंड मुख्यालय परिसर में स्वच्छता व्यवस्था की बदहाली शासन के स्वच्छता और महिला सम्मान से जुड़े दावों पर सवाल खड़े कर रही है। सभागार के पीछे बना महिला शौचालय आधा-अधूरा पड़ा है। आसपास झाड़-झंखाड़ और कूड़ा-करकट जमा होने से परिसर की स्थिति खराब है। शौचालय की दीवार पर यह भी नहीं लिखा है कि वह शौचालय है, जिससे उसकी पहचान तक स्पष्ट नहीं हो पाती।
इन दिनों ब्लॉक मुख्यालय पर पांच दिवसीय सेवा संकल्प दिवस का आयोजन चल रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं की सहभागिता हो रही है। ऐसे में महिला शौचालय की बदहाली से कार्यक्रम में आने वाली महिलाओं को बुनियादी जरूरत के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। महिला कार्यकर्ताओं ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि शौचालय की स्थिति उपयोग करने लायक नहीं है। कार्यक्रम में घंटों रहने वाली महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
जिस ब्लॉक से गांवों में स्वच्छता की निगरानी, वहीं व्यवस्था बेहाल
धनपतगंज ब्लॉक मुख्यालय से ग्रामीण विकास और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का संचालन होता है। ऐसे में परिसर में ही स्वच्छ और सुरक्षित महिला शौचालय की सुविधा न होना व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। सवाल यह भी है कि जब ब्लॉक मुख्यालय की स्वच्छता व्यवस्था ही दुरुस्त नहीं है तो गांवों में स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी किस तरह की जा रही है।
शौचालय का निर्माण अधूरा क्यों छोड़ा गया और परिसर की नियमित साफ-सफाई की जिम्मेदारी किसकी है, यह भी स्पष्ट नहीं है। क्या संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया है? यदि किया है तो अब तक सुधार क्यों नहीं कराया गया? इन सवालों का जवाब जिम्मेदारों से अपेक्षित है।
तकनीकी कारणों के हवाले से कब तक टलेगा समाधान
इस संबंध में सहायक ग्राम विकास अधिकारी (ग्रामीण विकास) विजय कुमार चौधरी ने बताया कि कुछ तकनीकी कारणों से शौचालय का कार्य अधर में फंसा हुआ है। हालांकि तकनीकी अड़चन अपनी जगह है, लेकिन ब्लॉक मुख्यालय आने वाली महिलाओं के लिए तत्काल वैकल्पिक और स्वच्छ शौचालय की व्यवस्था कराना भी जिम्मेदारों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
अब देखना है कि संबंधित विभाग महिला शौचालय की बदहाल स्थिति को कब तक दुरुस्त कराकर उसे उपयोग योग्य बनाता है। फिलहाल ब्लॉक मुख्यालय परिसर की यह तस्वीर स्वच्छता और महिला सम्मान से जुड़े दावों की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े कर रही है।




