वर्मी कंपोस्ट और बायोगैस इकाई की स्थापना के लिए मिलेगा अनुदान, 30 सितंबर तक कर सकते हैं आवेदन
इससे खेती की लागत घटेगी और किसानों की आय बढ़ेगी
बिहार राज्य जैविक मिशन के तहत सरकार देगी 50 प्रतिशत तक अनुदान
पटना /बिहार/ Etv News 24
राज्य में रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार ने बड़ी पहल की है। कृषि विभाग राज्य जैविक मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं के लिए भारी अनुदान दे रहा है। इसके तहत पक्का वर्मी कंपोस्ट पिट इकाई, गोबर/बायोगैस इकाई एवं व्यावसायिक वर्मी कंपोस्ट इकाई की स्थापना के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 निर्धारित है।माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने किसानों से बिहार राज्य जैविक मिशन की योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्राकृतिक रूप से उपलब्ध खाद का इस्तेमाल कर फसल की उपज बढ़ाई जाए ताकि किसानों की उर्वरकों के लिए बाजार पर निर्भरता कम हो। हमारी कोशिश है कि खेती की लागत कम हो और किसानों की आय बढ़े।उन्होंने कहा कि इससे राज्य में रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा मिलेगा, जिससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी बल्कि लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा। डीबीटी पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों को पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर लाभ दिया जाएगा।*मिलेगा 50 फीसदी का अनुदान*माननीय कृषि मंत्री ने बताया कि पक्का वर्मी कंपोस्ट पिट इकाई के अंतर्गत प्रत्येक लाभुक को अधिकतम तीन इकाइयों का लाभ दिया जाता है। प्रत्येक पिट की कुल लागत 10,000 रुपए पर 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 5,000 रुपए, जो कम हो, का अनुदान दिया जाता है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 51,000 पक्का वर्मी कंपोस्ट पिट इकाइयों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।गोबर अथवा बायोगैस इकाई योजना के अंतर्गत प्रत्येक लाभुक को एक इकाई का लाभ दिया जाता है। इस पर कुल लागत 42,000 रुपए का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 21,000 रुपए, जो भी कम हो, का अनुदान तथा 1,500 रुपए की टर्न राशि के रूप में अतिरिक्त सहयोग प्रदान किया जाता है। चालू वित्तीय वर्ष में 300 इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित है।*व्यावसायिक वर्मी कंपोस्ट इकाई पर भी मिलेगा अनुदान*उन्होंने कहा कि व्यावसायिक वर्मी कंपोस्ट इकाई योजना के अंतर्गत 3 हजार, 2 हजार एवं एक हजार मीट्रिक टन क्षमता वाली इकाइयों के लिए क्रमशः 50 लाख रुपए, 32 लाख रुपए एवं 16 लाख रुपए की लागत पर 40 प्रतिशत अथवा अधिकतम क्रमशः 20 लाख रुपए, 12.80 लाख रुपए एवं 6.40 लाख रुपए, जो कम हो, का अनुदान दिया जाता है। वर्ष 2026-27 में ऐसी 20 इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।




