डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन
25-30 हजार मानदेय की मांग बोलीं जिम्मेदारी बढ़ी तो मेहनताना भी बढ़े स्थायीकरण से बीमा तक चार मांगें
प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश/Etv News 24/संवाददाता वागीश कुमार
ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं और वित्तीय समावेशन को गांव-गांव तक पहुंचाने वाली बैंक सखियों ने अब अपने मानदेय और सुविधाओं को लेकर मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को बड़ी संख्या में बैंक सखियों ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
इसके बाद जिलाधिकारी को संबोधित चार सूत्रीय मांग-पत्र सौंपते हुए समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की।
बैंक सखियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में उनकी जिम्मेदारी लगातार बनी हुई है। इसके बावजूद वर्तमान मानदेय महंगाई और काम के अनुपात में कम है। उन्होंने स्पष्ट मांग रखी कि मासिक मानदेय बढ़ाकर 25 से 30 हजार रुपये किया जाए।
प्रदर्शन के दौरान बैंक सखियों ने सेवा के स्थायीकरण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि लंबे समय से जिम्मेदारियों का निर्वहन करने वाले कर्मियों को सेवा की स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए। साथ ही प्रत्येक बैंक सखी को निःशुल्क स्मार्टफोन और प्रतिमाह मुफ्त डेटा व कॉलिंग रिचार्ज उपलब्ध कराने की मांग की गई।
सामाजिक सुरक्षा का भी उठाया सवाल
बैंक सखियों ने प्रत्येक कर्मी का निःशुल्क जीवन एवं स्वास्थ्य बीमा कराने की मांग रखी। इसके अलावा बैंक शाखाओं में बैठने के लिए उचित स्थान, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी की गई।
प्रदर्शन के जरिए बैंक सखियों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि ग्रामीण वित्तीय व्यवस्था में उनकी भूमिका केवल कागजी जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि जब उनसे गांवों में योजनाओं और बैंकिंग सेवाओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाने की अपेक्षा की जाती है तो उनके मानदेय और कार्य परिस्थितियों पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।
चार सूत्रीय मांग-पत्र के माध्यम से बैंक सखियों ने जिलाधिकारी से संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश जारी करने और मांगों के समाधान की दिशा में ठोस पहल करने की अपील की। अब प्रशासनिक स्तर पर इस मांग को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर बैंक सखियों की नजर रहेगी।




