तिलौथू रोहतास/ Etv News 24
तिलौथू प्रखंड अन्तर्गत स्थित सरस्वती विद्या मंदिर, तिलौथू की वंदना सभा पर अमर सेनानी शहीद भगत सिंह की जयंती मनायी गई। जिसका उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जंगलेश प्रसाद चौरसिया, पूर्व प्रधानाचार्य एवं पूर्व प्रकल्प प्रमुख सरस्वती विद्या मंदिर, तिलौथू ने भगत सिंह के चित्र पर पुष्पार्चन कर किया। इसी प्रकार भगत सिंह देश को स्वतंत्र करने की योजना बनाये फिर योजनानुसार कार्य किया। बचपन से ही उनके क्रियाकलाप से देश को स्वतंत्र करने की एक जुनून दिखती थी जो बहुत ही कम उम्र में उन्होंने कर दिखाया।
इनकी कार्यशैली प्रत्येक भारतीय को प्रेरणा देती है कि देश के लिए सब कुछ बल्कि प्राण तक न्योछावर कर देना चाहिए। आचार्य रवीन्द्र प्रसाद ने वीररस की कविताएंँ सुनायीं। तथा उनके जीवनी पर प्रकाश डाला। विद्यालय के उपप्रधानाचार्य सर्वेश चन्द्र मिश्र ने कहा कि भगत सिंह की जब आयु 12 साल थी तब उन्होंने 1919 में अंग्रेजों द्वारा किए गए जलियांवाला बाग वीभत्स कांड को देखा और उसमें खून से सनी हुई मिट्टी को देखकर उनकी आत्मा को एक बार झकझोरा और संकल्प लिया कि बिना देश को अंग्रेजों से भगाए मैं चैन से नहीं बैठूंगा।
इसी क्रम में उन्होंने 1928 में इसी प्रतिक्रिया के स्वरूप असेंबली में बम फेंका और स्वयं से अपने आप को समर्पित कर दिया तत्पश्चात् अंग्रेजों ने उन्हें फांसी पर लटका दिया गया। उनके स्वतंत्रता संग्राम टीम के तीन सदस्य राजगुरु, सुखदेव और स्वयं भगत सिंह को फांसी दी गयी। वे हंसते-हंसते और इंकलाब जिंदाबाद कि नारा लगाते हुए अंतिम सांस ली। प्रधानाचार्य प्रमोद कुमार सिन्हा ने संबोधित करते हुए कहा कि उनके जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।
वे असेंबली में बम किसी के मारने के लिए नहीं बल्कि अंग्रेजों सरकार को विरोध जताने के लिए किया था। उनके साहस या प्रेरणा लेने की आवश्यकता है कि वह बम फेंक कर भागे नहीं बल्कि इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाते हुए स्वयं से अपने को समर्पित किया। इस जयंती के अवसर पर इनके जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। इनके अंदर कूट-कूट कर देशभक्ति भरी थी। महापुरुषों के आचरण से ही अपना देश सर्वोच्च पद पर पहुंचेगा ।अंत में राष्ट्रगान से कार्यक्रम का समापन हुआ।




