कुड़वार में वन विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों की कटाई और बिना ट्रांजिट पास लकड़ी ढुलाई का आरोप
छह माह में जारी परमिटों की जांच और किसानों के घर जाकर लकड़ी का सत्यापन कराने की मांग
उत्तर प्रदेश / etv news 24 ब्यूरो / एजेंसी लखनऊ
राजधानी लखनऊ के जनपद सुल्तानपुर के कुड़वार विकासखंड मे हरे-भरे पेड़ों की कटान को लेकर वन विभाग की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। आरोप है कि किसानों के नाम पर पेड़ों के कटान का परमिट जारी कराया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में पेड़ों की खरीद-बिक्री और कटान का काम लकड़ी ठेकेदारों द्वारा कराया जा रहा है। इतना ही नहीं, प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों की कटाई और लकड़ी के परिवहन में नियमों की अनदेखी किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से यह पूरा खेल संचालित हो रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
किसानों के नाम परमिट, कटान ठेकेदारों के जिम्मे
ग्रामीणों का कहना है कि कुड़वार क्षेत्र में पेड़ों के कटान के लिए जारी होने वाले परमिटों में कई तरह की अनियमितताएं बरती जा रही हैं। कागजों में पेड़ किसान के नाम पर दर्ज होता है और परमिट भी उसी के नाम जारी होता है, लेकिन मौके पर कटान ठेकेदारों द्वारा कराया जाता है।
आरोप है कि किसान पहले ही पेड़ ठेकेदारों को बेच देते हैं और बाद में उनकी खतौनी के आधार पर कटान की अनुमति प्राप्त कर ली जाती है। इसके बाद ठेकेदार पेड़ कटवाकर लकड़ी की बिक्री करते हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इस तरीके से क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ों का कटान हो चुका है। वहीं, कुछ परमिट अभी प्रक्रिया में होने की भी चर्चा है।
सेवानिवृत्त कर्मचारी की भूमिका पर भी उठे सवाल
स्थानीय सूत्रों के हवाले से वन विभाग के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि विभाग में पुराने संपर्कों का इस्तेमाल कर वह लकड़ी ठेकेदारों और विभागीय लोगों के बीच संपर्क सूत्र का काम कर रहे हैं। यह भी आरोप है कि कुछ मामलों में पहले उड़नदस्ते की कार्रवाई और जुर्माने के बाद पेड़ों की कटाई कराकर लकड़ी की बिक्री की जाती है। हालांकि, इस पूरे मामले में संबंधित व्यक्ति और विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है।
ट्रांजिट पास के बिना लकड़ी परिवहन का आरोप
मामले में सबसे बड़ा सवाल लकड़ी के परिवहन और ट्रांजिट पास (टीपी) को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पेड़ों की कटाई के बाद लकड़ी से लदी ट्रैक्टर-ट्रालियां सड़कों पर बेरोकटोक दौड़ रही हैं। क्षेत्र की कुछ आरा मशीनों पर भी लकड़ी पहुंचाए जाने की शिकायतें हैं। लोगों का सवाल है कि यदि लकड़ी का कटान और परिवहन नियमानुसार हो रहा है तो उसके लिए आवश्यक ट्रांजिट पास कहां हैं? क्या लकड़ी का पूरा हिसाब विभागीय अभिलेखों में दर्ज है? यदि बिना टीपी लकड़ी का परिवहन किया जा रहा है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
जांच हुई तो सामने आ सकती हैं अनियमितताएं
लगातार पेड़ों की कटाई से क्षेत्र के हरित आवरण पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने जिलाधिकारी तथा प्रभागीय वनाधिकारी से पिछले छह माह में कुड़वार क्षेत्र में जारी किए गए सभी कटान परमिटों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही परमिट धारक किसानों के घर पहुंचकर लकड़ी का भौतिक सत्यापन कराने, संबंधित आरा मशीनों के अभिलेखों की जांच करने और ट्रांजिट पास के बिना लकड़ी का परिवहन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
लोगों का कहना है कि यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो परमिट जारी होने से लेकर पेड़ों की कटाई, लकड़ी की बिक्री और परिवहन तक की पूरी कड़ी सामने आ सकती है। शिकायतों में यदि विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों या अन्य लोगों की संलिप्तता प्रमाणित होती है तो उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।




