10 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई न होने से नाराज महासंघ ने सीएम योगी को लिखा पत्र, हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी समाधान नहीं होने का आरोप
विनियमितीकरण, सेवा नियमावली और कैशलेस इलाज की मांग; आंदोलन तेज करने और चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाने की चेतावनी
राजधानी लखनऊ प्रदेश के नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत और जलकल विभागों में कार्यरत कर्मचारियों की लंबित समस्याओं को लेकर स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ ने एक बार फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग की है। महासंघ के अध्यक्ष शशि कुमार मिश्र ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर नौ वर्षों से लंबित 10 सूत्रीय मांगपत्र पर अब तक ठोस निर्णय नहीं होने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन स्तर पर लगातार पत्राचार, बैठकों और वार्ताओं के बावजूद कर्मचारियों की समस्याएं फाइलों में ही अटकी हुई हैं। इससे प्रदेश के लाखों निकाय कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
महासंघ अध्यक्ष ने पत्र में बताया कि वर्ष 2019 से लेकर नवंबर 2025 तक नगर विकास विभाग और शासन के विभिन्न अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। इनमें 20 फरवरी 2019, एक मार्च 2019, पांच अगस्त 2021, 28 नवंबर 2022, 12 मई 2023, 25 अक्टूबर 2024, 22 अप्रैल 2025 और सात नवंबर 2025 की बैठकें शामिल हैं। इन बैठकों के कार्यवृत्त भी जारी हुए, लेकिन महासंघ के मुताबिक मांगों पर प्रभावी आदेश जारी नहीं हो सके। नगर विकास मंत्री को भी अक्टूबर 2024 और फरवरी 2025 में पत्र भेजकर समस्याओं के समाधान की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
शशि कुमार मिश्र के अनुसार महासंघ ने मुख्यमंत्री, दोनों उपमुख्यमंत्रियों, प्रधानमंत्री, नगर विकास मंत्री, मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव कार्मिक एवं वित्त और नगर विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार पत्र भेजे। छह अप्रैल 2026 को प्रमुख सचिव नगर विकास को अंतिम अनुस्मारक भी दिया गया। इसके बाद जुलाई 2026 में महासंघ ने लंबित समस्याओं के समाधान के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
महासंघ का कहना है कि रिट संख्या 6329/2026 में 10 जुलाई 2026 को न्यायालय ने नगर विकास विभाग को 27 जुलाई तक अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी देने का निर्देश दिया था। इसके बाद 27 जुलाई को भी समयबद्ध तरीके से समस्याओं के निस्तारण के आदेश दिए गए, लेकिन करीब तीन महीने बीतने के बाद भी 10 सूत्रीय मांगपत्र पर कोई ठोस निर्णय या शासनादेश जारी नहीं हुआ। महासंघ ने इसे कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं की अनदेखी बताया है।
विनियमितीकरण से कैशलेस इलाज तक की मांग, आंदोलन की चेतावनी
महासंघ ने दैनिक वेतन, संविदा और तदर्थ (धारा-108) के तहत कार्यरत कर्मचारियों के विनियमितीकरण का मुद्दा भी उठाया है।
पत्र के मुताबिक 31 दिसंबर 2001 तक कार्यरत कर्मचारियों के विनियमितीकरण के लिए 24 फरवरी 2016 को जारी आदेश का अनुपालन अब तक नहीं हुआ।
वहीं तदर्थ कर्मचारियों के संबंध में कार्मिक विभाग के 21 नवंबर 2021 के आदेश को भी लागू नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।
इसके अलावा अकेन्द्रियत सेवा के निकाय कर्मचारियों के लिए वर्ष 2021 में अधिसूचना जारी होने के बावजूद सेवा नियमावली नहीं बनाए जाने, लिपिक, राजस्व और चालक संवर्ग को छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुरूप ढांचा नहीं दिए जाने तथा वेतन विसंगतियां दूर नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया गया है। महासंघ ने राज्य कर्मचारियों की तर्ज पर कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने, सफाई कर्मचारियों और आउटसोर्सिंग कर्मियों को सेवा संबंधी लाभ समय से देने की भी मांग की है।
मुख्यमंत्री से इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी करने की अपील करते हुए महासंघ अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों को समय रहते न्याय नहीं मिला तो प्रदेशभर के निकाय कर्मचारी और उनके परिवार व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में भी कर्मचारी अपनी भूमिका निर्णायक रूप से निभाने को मजबूर होंगे।




