किसानों के अरमानों पर फिरा पानी
खाद के लिए समितियों पर झेली धक्का-मुक्की सिंचाई के लिए भी तरसे किसान
अब प्रति बीघा 12 हजार रुपये की लागत डूबी कटाई के समय खेतों में जलभराव से तैयार और कटी फसल बर्बाद
किसानों ने सरकार से तत्काल मुआवजे की उठाई मांग
उत्तर प्रदेश /etv news 24 ब्यूरो एजेंसी लखनऊ
राजधानी लखनऊ के जनपद सुल्तानपुर मे बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने जिले के किसानों की छह महीने की मेहनत पर पानी फेर दिया है। शुक्रवार सुबह से हो रही मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं के चलते खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल जमीन पर बिछ गई, जबकि कटाई के बाद खेतों में पड़ी फसल जलभराव के कारण पानी में डूब गई। भदैया, धनपतगंज के समरथपुर, दोस्तपुर और अखंडनगर विकासखंड के कई गांवों में फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। दीपावली के त्योहार पर जहां घरों में खुशियां मनाने की तैयारी होनी चाहिए थी, वहीं किसानों के परिवारों में मायूसी छाई हुई है।
किसानों का कहना है कि इस फसल को तैयार करने के लिए उन्हें कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ा। बुवाई के समय डीएपी और यूरिया की किल्लत के चलते सहकारी समितियों पर घंटों कतार में खड़ा होना पड़ा। खाद की एक बोरी के लिए किसानों को धक्का-मुक्की तक झेलनी पड़ी। किसी तरह खाद की व्यवस्था हुई तो सिंचाई के लिए भी संघर्ष करना पड़ा। भीषण गर्मी में नहरों में पानी नहीं मिला और सरकारी नलकूपों से भी पर्याप्त सिंचाई नहीं हो सकी। ऐसे में किसानों को निजी पंपिंग सेटों का सहारा लेना पड़ा।
किसानों के मुताबिक, धान की फसल तैयार करने में प्रति बीघा करीब 12 हजार रुपये तक की लागत आई है। इसके लिए कई किसानों ने कर्ज भी लिया था। उम्मीद थी कि फसल बिकने के बाद बच्चों के लिए नए कपड़े खरीदेंगे, घर की जरूरतें पूरी करेंगे और कर्ज चुकाएंगे, लेकिन ऐन कटाई के समय बारिश ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। खेतों में पानी भरने से धान की बालियां और दाने खराब होने की आशंका है। ऐसे में किसानों के सामने दीपावली मनाने के साथ ही परिवार के भरण-पोषण का संकट भी खड़ा हो गया है।
किसानों ने जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार से तत्काल नुकसान का सर्वे कराने की मांग की है। उनका कहना है कि लेखपालों की टीम गांव-गांव और खेतों तक पहुंचकर वास्तविक क्षति का आकलन करे। प्रभावित किसानों को बिना देरी उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि आर्थिक संकट से जूझ रहे अन्नदाताओं को राहत मिल सके।




