गेट और पत्थर के पिलर टूटे नजर आया चार घंटे के प्रदर्शन के बीच
सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, प्रशासन की निगरानी और कार्रवाई पर उठे सवाल
संजय यदुवंशी प्रकरण को लेकर प्रदर्शन, मांगें पूरी नहीं होने पर विधानसभा तक आंदोलन की चेतावनी
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
तिकोनिया पार्क में संजय यदुवंशी प्रकरण को लेकर चल रहे प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय विवादित हो गई, जब प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने पार्क के गेट और पत्थर के पिलर को तोड़ दिया। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने की इस घटना ने कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदर्शन के दौरान पार्क की संपत्ति को क्षति पहुंचने से सरकारी व्यवस्था की जवाबदेही पर भी सवाल उठ रहे हैं।
प्रदर्शनकारी संजय यदुवंशी धम्मौर थाने की पुलिस टीम के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर तिकोनिया पार्क में धरने पर बैठे थे। उनकी मांग है कि दबिश देने गई पुलिस टीम के संबंधित कर्मी माफी मांगें या उन्हें निलंबित किया जाए। मांगें पूरी नहीं होने पर उन्होंने विधानसभा तक प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी है।
सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, जिम्मेदारी किसकी
तिकोनिया पार्क में प्रदर्शन के दौरान गेट और पत्थर के पिलर तोड़े जाने की घटना ने सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर प्रदर्शन के दौरान ऐसी स्थिति कैसे बनी और पार्क की संपत्ति को नुकसान पहुंचने से रोकने के लिए क्या इंतजाम किए गए थे? इन सवालों का जवाब प्रशासन को देना होगा। घटना में नुकसान की स्थिति और जिम्मेदार लोगों की पहचान जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचने के मामले में शासन-प्रशासन की भूमिका चर्चा में है। सवाल यह भी है कि मौके पर मौजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए। हालांकि, अधिकारियों की मौजूदगी, घटना के समय की परिस्थितियों और कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
मांगों पर अड़े प्रदर्शनकारी, आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी
संजय यदुवंशी ने अपने और अपने परिवार के लिए न्याय की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि धम्मौर थाने की पुलिस टीम के खिलाफ कार्रवाई होने तक उनका विरोध जारी रह सकता है। उन्होंने मांगें पूरी नहीं होने पर विधानसभा तक आंदोलन ले जाने की चेतावनी दी है। अब देखना होगा कि प्रशासन प्रदर्शनकारियों की शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं।




