श्रुति गंगवार से लेकर राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडेय तक—संगठन, क्षेत्र और सामाजिक समीकरण पर फोकस
यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों का गणित, भाजपा के आठ प्रत्याशियों में नए चेहरों को मौका
लखनऊ उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को अपने आठ प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए। सूची में मंत्री धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं।
भाजपा की सूची में श्रुति गंगवार का नाम खास तौर पर चर्चा में है। वह झारखंड के राज्यपाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की बेटी हैं। श्रुति गंगवार बरेली क्षेत्र से जुड़ी हैं और अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की अध्यक्ष भी रही हैं। उनके नाम को रूहेलखंड क्षेत्र और कुर्मी समाज के प्रतिनिधित्व के संदर्भ में देखा जा रहा है।
वहीं राधाकांत ओझा प्रयागराज से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनकी उम्मीदवारी के जरिए भाजपा ने कानूनी एवं प्रबुद्ध वर्ग से जुड़े चेहरे को उच्च सदन में प्रतिनिधित्व देने का संदेश दिया है। कुछ रिपोर्टों में उनके आरएसएस से जुड़ाव का भी उल्लेख किया गया है।
गोपी कृष्ण पांडेय का राजनीतिक परिचय मुख्य रूप से भाजपा संगठन से जुड़ा रहा है। उन्होंने एबीवीपी से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और भाजपा संगठन के साथ-साथ किसान मोर्चा में भी जिम्मेदारियां संभाली हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वह कई राज्यों में किसान मोर्चा के प्रभारी रह चुके हैं और भाजपा के प्रदेश मंत्री का दायित्व भी संभाल चुके हैं।
भाजपा की पूरी सूची को देखें तो पार्टी ने संगठन से जुड़े नेताओं, पूर्व सांसद, मंत्री, पेशेवर क्षेत्र से जुड़े चेहरे और महिला प्रतिनिधित्व—सभी को जगह दी है। राजनीतिक विश्लेषण में इसे सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के साथ संगठनात्मक संतुलन की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है। भाजपा ने आठ प्रत्याशी उतारे हैं, जबकि मतदान 16 अक्टूबर को प्रस्तावित है। नामांकन की अंतिम तिथि छह अक्टूबर है।
राज्यसभा उम्मीदवारों की यह सूची ऐसे समय आई है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति 2027 विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रही है। हालांकि राज्यसभा चुनाव सीधे विधानसभा चुनाव का मुकाबला नहीं है, लेकिन प्रत्याशियों के चयन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, सामाजिक समूहों और संगठनात्मक पृष्ठभूमि का समावेश प्रदेश की व्यापक राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में चर्चा का विषय बन गया है।




