2031 तक 500 नए जीसीसी स्थापित करने का लक्ष्य, 6,467 रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स करेगी 634 करोड़ का निवेश
15 कंपनियों और 13 शिक्षण संस्थानों से हुए समझौते
लखनऊ उत्तर प्रदेश/Etv News 24/ब्यूरो एजेंसी
कभी उत्तर प्रदेश में निवेश करने से कतराने वाले उद्योगपति आज यहां बड़े पैमाने पर निवेश के लिए आगे आ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखनऊ के द सेंट्रम में आयोजित जीसीसी इनोवेशन समिट-2026 में कहा कि प्रदेश को अब तक 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है, जबकि साढ़े सात लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतरने के लिए तैयार हैं।
मुख्यमंत्री ने करीब दस वर्ष पहले के हालात का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय निवेशकों को लखनऊ बुलाना भी मुश्किल था। वर्ष 2015-16 में उत्तर प्रदेश के लिए इन्वेस्टर्स समिट दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में आयोजित करनी पड़ी थी। निवेशकों के मन में प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर आशंकाएं थीं। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति ही सुरक्षित नहीं होगा तो उसकी पूंजी कैसे सुरक्षित रह सकती है।
योगी ने कहा कि पहले उपद्रव, अराजकता और माफिया के वर्चस्व के कारण उत्तर प्रदेश की छवि प्रभावित हुई थी। अव्यवस्था और नीतिगत शिथिलता ने प्रदेश को बीमारू राज्यों की श्रेणी में पहुंचा दिया था। अब कानून-व्यवस्था में सुधार, बेहतर आधारभूत ढांचे और निवेश अनुकूल नीतियों के चलते प्रदेश की तस्वीर बदल रही है।
निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारना प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार फका उद्देश्य केवल निवेश प्रस्ताव जुटाना नहीं, बल्कि उन्हें उद्योगों की स्थापना और रोजगार सृजन में बदलना है। प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों के लिए 36 सेक्टोरल नीतियां बनाई गई हैं। निवेशकों को जरूरी सुविधाएं और सहयोग उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) का प्रमुख केंद्र बनाने की तैयारी है। वर्ष 2030-31 तक प्रदेश में 500 नए जीसीसी स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए चार करोड़ वर्ग फीट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस विकसित करने की योजना है। नोएडा के साथ लखनऊ, कानपुर और अन्य शहरों में भी तकनीक आधारित उद्योगों के विस्तार की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
पांच कंपनियों को लेटर ऑफ कम्फर्ट
समिट में मुख्यमंत्री ने हैवेल्स, एमरी प्राइस, मेटलाइफ, एलजी और डब्ल्यूएसपी की पांच प्रमुख जीसीसी परियोजनाओं के प्रतिनिधियों को लेटर ऑफ कम्फर्ट प्रदान किए। इन परियोजनाओं से कुल 6,467 रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना जताई गई। इसके अलावा निवेशकों के साथ 15 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान हुआ।
तकनीकी शिक्षा और उद्योगों की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के लिए 13 विश्वविद्यालयों एवं तकनीकी संस्थानों के साथ भी समझौते किए गए। इनमें आईआईटी कानपुर, आईआईटी बीएचयू, आईआईटी रुड़की, आईआईएम लखनऊ, आईआईआईटी लखनऊ, एकेटीयू और लखनऊ विश्वविद्यालय समेत प्रमुख संस्थान शामिल हैं।
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स लगाएगी 634 करोड़ रुपये
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रतिनिधि बृजेश शर्मा ने बताया कि कंपनी उत्तर प्रदेश में 634 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। यह राशि प्रतिभा विकास तथा अनुसंधान एवं विकास से जुड़े बुनियादी ढांचे पर खर्च की जाएगी। परियोजना से 500 से अधिक उच्च-मूल्य वाली नौकरियां पैदा होने की संभावना है।
समिट में माइक्रोसॉफ्ट इंडिया डेवलपमेंट सेंटर के प्रतिनिधि राजीव कुमार ने नोएडा में कंपनी के विस्तार का अनुभव साझा किया। वहीं, एचसीएल टेक के प्रतिनिधि किरण चेरुकुरी ने बताया कि कंपनी लखनऊ में 12,500 कर्मचारियों के साथ काम कर रही है। कंपनी एआई आधारित जीसीसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और डीप-टेक नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भी सहयोग कर रही है।
स्टार्टअप और तकनीकी प्रतिभा पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में एक्सप्रेसवे, हवाई संपर्क, मेट्रो, औद्योगिक भूमि और तकनीकी शिक्षा के विस्तार से निवेश की संभावनाएं बढ़ी हैं। सरकार के पास 75 हजार एकड़ का लैंड बैंक उपलब्ध होने की जानकारी भी दी गई। उन्होंने स्टार्टअप की बढ़ती संख्या और तकनीकी स्नातकों की उपलब्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं की प्रतिभा को वैश्विक कंपनियों से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।
कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश जीसीसी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी उद्योगों के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
समिट में राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल सहित विभिन्न कंपनियों, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।




