सीटें 1,410 से बढ़ाकर 2,820 की गईं, मेधावी विद्यार्थियों को उच्च कृषि शिक्षा के लिए मिलेगी आर्थिक मदद
36 हजार की जगह अब 60 हजार रुपये सालाना, किसान परिवारों के विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
लखनऊ उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों और खेतिहर मजदूरों के मेधावी बच्चों को उच्च कृषि शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के तहत छात्रवृत्ति की निर्धारित सीटों की संख्या दोगुनी करने के साथ ही आर्थिक सहायता की राशि भी बढ़ा दी गई है। अब पात्र विद्यार्थियों को सालाना 36 हजार रुपये के स्थान पर 60 हजार रुपये की छात्रवृत्ति मिलेगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर किसान परिवारों के बच्चों को कृषि क्षेत्र में उच्च शिक्षा हासिल करने में मदद मिलेगी।
राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की ओर से संचालित इस योजना के तहत कृषि विश्वविद्यालयों एवं कृषि संस्थानों में छात्रवृत्ति की सीटें 45 से बढ़ाकर 90 तथा कृषि महाविद्यालयों में 15 से बढ़ाकर 30 कर दी गई हैं। योजना में कुल निर्धारित सीटों की संख्या 1,410 से बढ़ाकर 2,820 की गई है। सीटों में वृद्धि से अधिक पात्र विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिल सकेगा।
मासिक छात्रवृत्ति तीन से बढ़ाकर पांच हजार रुपये
योजना के तहत मिलने वाली मासिक छात्रवृत्ति तीन हजार रुपये से बढ़ाकर पांच हजार रुपये कर दी गई है। इसके अनुसार चयनित विद्यार्थियों को अब सालाना 60 हजार रुपये मिलेंगे। पहले यह राशि 36 हजार रुपये सालाना थी। इस तरह प्रत्येक लाभार्थी को एक वर्ष में 24 हजार रुपये की अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी। सरकार के इस फैसले से कृषि, उद्यान, वानिकी, पशुपालन और संबंधित विषयों की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
नौ वर्षों में 6,454 विद्यार्थियों को मिला लाभ
मंडी परिषद के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक इस योजना के तहत 6,454 विद्यार्थियों को करीब 22.90 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति वितरित की जा चुकी है। सीटों की संख्या और छात्रवृत्ति की राशि बढ़ाए जाने से योजना का दायरा विस्तृत होगा। इसका उद्देश्य किसान परिवारों के मेधावी बच्चों को आर्थिक कठिनाइयों के कारण उच्च शिक्षा से वंचित होने से बचाना और कृषि क्षेत्र में कुशल विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार करना है।
मेरिट के आधार पर होगा विद्यार्थियों का चयन
योजना का लाभ उत्तर प्रदेश के निवासी किसानों और खेतिहर मजदूरों के पुत्र-पुत्रियों तथा उन पर पूर्ण रूप से आश्रित पात्र विद्यार्थियों को दिया जाता है। स्नातक स्तर पर आवेदन के लिए यूपी बोर्ड से इंटरमीडिएट में न्यूनतम 70 प्रतिशत और अन्य बोर्ड से 85 प्रतिशत अंक निर्धारित हैं। वहीं, स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए स्नातक स्तर पर कम से कम 70 प्रतिशत अंक होना आवश्यक है। विद्यार्थियों का चयन निर्धारित पात्रता और मेरिट के आधार पर किया जाएगा।
मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, छात्रवृत्ति की सीटों और धनराशि में वृद्धि से आर्थिक रूप से कमजोर किसान परिवारों के मेधावी विद्यार्थियों को उच्च कृषि शिक्षा प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। इससे कृषि क्षेत्र में विशेषज्ञों के साथ कृषि आधारित उद्यमियों की नई पीढ़ी तैयार करने के अवसर भी बढ़ेंगे।




