14वें-15वें वित्त के भुगतान अभिलेखों में कहीं सचिव तो कहीं प्रधान के हस्ताक्षर गायब
धुंधले बिल भी अपलोड होने से बढ़ी चिंता, मूल अभिलेख और मौके के कार्यों के सत्यापन की मांग
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश कुमार
सुलतानपुर के विकासखंड लम्भुआ के ग्राम पंचायतों में 14वें और 15वें वित्त से संबंधित ऑनलाइन भुगतान अभिलेखों के अवलोकन के बाद बिलों की प्रमाणिकता और भुगतान प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ऑनलाइन उपलब्ध कुछ अभिलेखों में संबंधित ग्राम पंचायत सचिव के हस्ताक्षर दिखाई नहीं देने की बात सामने आई है। कई बिलों पर केवल ग्राम प्रधान के हस्ताक्षर नजर आ रहे हैं, जबकि कुछ दस्तावेजों में प्रधान और सचिव दोनों के हस्ताक्षर स्पष्ट नहीं हैं।
मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भुगतान से जुड़े बिल-वाउचर निर्धारित प्रक्रिया के तहत अभिलेखीय जांच का आधार होते हैं। ऐसे में यदि किसी भुगतान से संबंधित ऑनलाइन दस्तावेजों पर आवश्यक हस्ताक्षर स्पष्ट नहीं हैं तो यह जांच का विषय बन जाता है कि भुगतान से पहले अभिलेखों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया।
धुंधले बिलों से सत्यापन में मुश्किल
ऑनलाइन रिकॉर्ड में कुछ ऐसे बिल भी होने की बात सामने आई है, जिनकी तस्वीर बेहद धुंधली है। इनमें फर्म का नाम, सामग्री या सेवा का विवरण, भुगतान की राशि समेत अन्य महत्वपूर्ण प्रविष्टियां स्पष्ट रूप से पढ़ना मुश्किल बताया जा रहा है। इससे संबंधित भुगतान की प्राथमिक स्तर पर जांच और दस्तावेज की प्रमाणिकता सुनिश्चित करना कठिन हो जाता है।
सवाल यह है कि यदि भुगतान प्रक्रिया में बिल-वाउचर अपलोड किए जाते हैं तो अस्पष्ट अथवा आवश्यक हस्ताक्षर से रहित दस्तावेज ऑनलाइन रिकॉर्ड का हिस्सा कैसे बने। क्या अपलोड किए गए अभिलेखों की गुणवत्ता और प्रमाणिकता की जांच संबंधित स्तर पर की गई? यदि जांच हुई तो ऐसी कमियां सामने आने के बावजूद भुगतान प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ी, यह भी जांच का विषय है।
ऑनलाइन रिकॉर्ड से मूल फाइल तक हो जांच
मामले की वास्तविक स्थिति केवल ऑनलाइन अभिलेख देखने से स्पष्ट नहीं हो सकती। इसके लिए संबंधित ग्राम पंचायतों की मूल फाइल, बिल-वाउचर, स्वीकृति पत्र, संबंधित रजिस्टर, बैंक भुगतान विवरण और कार्य से जुड़े अभिलेखों का मिलान आवश्यक होगा। साथ ही जिन कार्यों के नाम पर भुगतान किया गया है, उनका मौके पर सत्यापन भी कराया जाना जरूरी है।
जांच में यह देखा जाना चाहिए कि ऑनलाइन अपलोड किए गए बिल मूल अभिलेखों से मेल खाते हैं या नहीं, उन पर निर्धारित हस्ताक्षर मौजूद हैं अथवा नहीं और भुगतान की स्वीकृति किस स्तर पर दी गई। यदि ऑनलाइन रिकॉर्ड और मूल अभिलेखों में अंतर मिलता है तो उसकी जिम्मेदारी भी निर्धारित की जानी चाहिए।
मॉनिटरिंग व्यवस्था पर भी सवाल
ऑनलाइन भुगतान अभिलेखों की विभागीय स्तर पर मॉनिटरिंग और सत्यापन की व्यवस्था है तो बिना आवश्यक हस्ताक्षर वाले अथवा अस्पष्ट दस्तावेज भुगतान प्रक्रिया तक पहुंचने का कारण भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। वहीं, यदि नियमित जांच की व्यवस्था नहीं है तो इसकी समीक्षा की जरूरत है।
स्थानीय स्तर पर ऑनलाइन अभिलेखों के आधार पर दस्तावेजी पड़ताल किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी व्यक्ति को अनियमितता का दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। संबंधित भुगतान की मूल फाइल, ऑनलाइन रिकॉर्ड और मौके पर कराए गए कार्यों का स्वतंत्र मिलान होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल दस्तावेजी लापरवाही का है या वित्तीय अनियमितता का। ऐसे में पूरे प्रकरण की अभिलेखीय और स्थलीय जांच कराकर स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।




