देवरिया की महारैली में राजभर की हुंकार, पूर्वांचल की सत्ता में हिस्सेदारी का किया बड़ा दावा
2027 से पहले गरमाया पूर्वांचल का मुद्दा, राजभर ने आरक्षण से लेकर सत्ता तक साधा सियासी निशाना
देवरिया उत्तर प्रदेश/Etv News 24/संवाददाता वागीश कुमार
उत्तर प्रदेश के देवरिया सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की ओर से रविवार को सोनूघाट स्थित जनता इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित सामाजिक समरसता महारैली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने प्रदेश की सियासत को लेकर बड़ा दावा कर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश चार हिस्सों में बंटेगा और यदि पूर्वांचल अलग राज्य बनता है तो वहां राजभर समाज का बेटा मुख्यमंत्री बनेगा। राजभर के इस बयान से पूर्वांचल की राजनीति में एक बार फिर अलग राज्य और राजनीतिक हिस्सेदारी का मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है।
रैली में राजभर ने कार्यकर्ताओं के बीच राजनीतिक भागीदारी का संदेश देते हुए कहा कि समाज को अब केवल संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि सत्ता में प्रभावी हिस्सेदारी के लिए भी संगठित होना होगा। उन्होंने पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की अपनी राजनीतिक सोच को मंच से दोहराते हुए इसे क्षेत्र के विकास और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जोड़ा।
27 प्रतिशत आरक्षण में हिस्सेदारी का मुद्दा भी उठाया
ओम प्रकाश राजभर ने पिछड़े वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण में आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी और वर्गीकरण की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि आरक्षण का लाभ समाज की सभी पिछड़ी जातियों तक समान रूप से पहुंचना चाहिए। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक और राजनीतिक बदलाव की बुनियाद बताते हुए गरीब व पिछड़े वर्ग के बच्चों को पढ़ाने पर जोर दिया।
विपक्ष पर भी साधा निशाना
रैली के दौरान राजभर ने सपा, बसपा और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर भी राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संगठन मजबूत करने और आगामी राजनीतिक परिस्थितियों के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। उनके भाषण में सामाजिक भागीदारी, आरक्षण और पूर्वांचल की अलग राजनीतिक पहचान जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
फिलहाल कोई नया बंटवारा प्रस्ताव नहीं
राजभर के बयान के बाद उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन को लेकर राजनीतिक चर्चा जरूर तेज हुई है, लेकिन फिलहाल प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने अथवा अलग पूर्वांचल राज्य बनाने को लेकर कोई नया सरकारी निर्णय सामने नहीं आया है। इससे पहले भी उत्तर प्रदेश के विभाजन का मुद्दा विभिन्न राजनीतिक दौर में उठता रहा है।
महारैली में दिए गए राजभर के बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पूर्वांचल की सामाजिक और राजनीतिक गोलबंदी के संदर्भ में देखा जा रहा है। खासतौर पर राजभर समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी और अलग पूर्वांचल राज्य का मुद्दा आने वाले दिनों में सियासी बहस को और धार दे सकता है।




