जिलाधिकारी कार्यालय पर सरकार के खिलाफ की नारेबाजी, मुख्यमंत्री को संबोधित चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपा
आशा कर्मियों और संगिनियों के बकाया प्रोत्साहन राशि का दीपावली से पहले भुगतान करने की मांग
लखनऊ उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
ऐक्टू और आइसा नेताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों को फर्जी बताते हुए उनकी वापसी की मांग को लेकर मंगलवार को ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) के आह्वान पर कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित चार सूत्रीय मांगपत्र जिला प्रशासन को सौंपा।
पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत ऐक्टू के जिला मंत्री कुमार मधुसूदन मगन और उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन की जिलाध्यक्ष कमला गौतम के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ता सरकार विरोधी नारे लगाते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने ऐक्टू और आइसा नेताओं पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने तथा आंदोलनकारी संगठनों के खिलाफ कथित उत्पीड़न बंद करने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान कमला गौतम, ऐक्टू जिला मंत्री कुमार मधुसूदन मगन और ऐपवा की जिला संयोजिका सरोजिनी बिष्ट ने आरोप लगाया कि 23 अक्टूबर को लखनऊ के ईको गार्डन में आशा कर्मियों के महाजुटान के दौरान लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन किया गया था।
कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त होने के बाद एक अन्य सरकारी यूनियन की ओर से कथित रूप से प्रायोजित घटना में ऐक्टू और आइसा नेताओं को जोड़कर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। वक्ताओं ने इसे दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई बताते हुए मुकदमा तत्काल वापस लेने की मांग की।
ज्ञापन में आशा कर्मियों और संगिनियों की वर्षों से लंबित प्रोत्साहन राशि का दीपावली से पहले भुगतान कराने, स्वास्थ्य मंत्री और मिशन निदेशक के बीच वार्ता में बनी सहमतियों को लागू करने तथा प्रदेश के प्रत्येक गांव में आशा, संगिनी और एएनएम के कार्य निष्पादन के लिए एक क्वार्टर की व्यवस्था कराने की मांग भी शामिल रही।
प्रदर्शन में इनौस के राज्य सहसचिव राजीव गुप्ता, निर्माण मजदूर यूनियन की अध्यक्ष मंजू गौतम, ऐपवा नेत्री सुमन सेंगर, सरिता, सुदामा, लज्जावती, प्रेमा, तुलसी सोनकर, तारावती, अंजली, मंसूरा, राम अनुज ओझा और रामदेवी सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।




