20 नवंबर तक रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा, 50 जिलों का सर्वे पूरा, 25 जिलों का भ्रमण बाकी
आयोग तीन महीने का अतिरिक्त समय मांगने की तैयारी में, 31 दिसंबर से पहले रिपोर्ट आने की उम्मीद कम
लखनऊ उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
सूत्रों के मुताबिक मिली जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर देरी के आसार नजर आने लगे हैं। हाईकोर्ट की ओर से तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने के आदेश के बावजूद चुनावी प्रक्रिया निर्धारित समय पर पूरी होना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसकी प्रमुख वजह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण निर्धारित करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग की सर्वे रिपोर्ट में संभावित देरी बताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, पिछड़ा वर्ग आयोग को 20 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन अब तक प्रदेश के 75 जिलों में से 50 जिलों का ही सर्वे पूरा हो सका है। शेष 25 जिलों में आयोग का भ्रमण और सर्वे कार्य अभी बाकी है। ऐसे में निर्धारित समयसीमा के भीतर रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपना मुश्किल माना जा रहा है।
सूत्रों का दावा है कि आयोग शासन से रिपोर्ट सौंपने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय मांग सकता है। यदि ऐसा होता है तो 31 दिसंबर से पहले रिपोर्ट आने की संभावना कम हो जाएगी। रिपोर्ट में देरी का सीधा असर पंचायत चुनाव की तैयारियों पर पड़ सकता है। ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चुनावी सीटों के आरक्षण और अन्य तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा सकेगा। ऐसे में हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक निर्धारित अवधि में पंचायत चुनाव कराना सरकार और निर्वाचन आयोग के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
हालांकि, आयोग की ओर से अतिरिक्त समय मांगने और चुनाव कार्यक्रम में देरी को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।




