सिंधी के साथ सिविल सेवा की पढ़ाई का मिलेगा अवसर, लखनऊ में विशेषज्ञों ने तैयार की पाठ्यक्रम की रूपरेखा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत भाषा से रोजगार तक पहुंचाने पर जोर, देशभर के सिंधी विद्वानों ने दिए सुझाव
लखनऊ उत्तर प्रदेश/Etv News 24/संवाददाता वागीश
सिंधी भाषा, साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश सिंधी अकादमी ने महत्वपूर्ण पहल की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) के तहत भारतीय भाषा सिंधी को रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से लखनऊ में ‘सिंधी एवं सिविल सेवा अध्ययन में बीए ऑनर्स’ पाठ्यक्रम को लेकर एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें देशभर के शिक्षाविदों, सिंधी भाषा के विद्वानों, साहित्यकारों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लेकर पाठ्यक्रम की रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया।
कार्यशाला में राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद, नई दिल्ली के निदेशक एचके मिश्र, पूर्व निदेशक डॉ. रवि प्रकाश टेकचंदानी, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के लखनऊ परिसर के निदेशक एवं पूर्व कुलपति प्रो. सर्वनारायण झा, सिंधी विषय के साथ सफल आईएएस अधिकारी संदीप भाग्या, आईपीएस अमित तोलानी और आईपीएस लोहित मतानी सहित कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं। इसके अलावा डॉ. कमला गोकलानी (अजमेर), सुंदरदास गोहरानी (कानपुर), डॉ. शीलवंत सिंह, राजाराम, कपिल हालानी (अयोध्या), मोहनदास लधानी, जेसी प्रकाश चुग, पूजा (उरई), जयेश शर्मा (दिल्ली), सुधामचंद चांदवानी और सिद्धार्थ मोदियानी ने भी सहभागिता की। कुलपति प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी समेत कई विद्वान ऑनलाइन जुड़े।
कार्यशाला का आयोजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और मनीष चौहान, प्रमुख सचिव भाषा एवं कार्यकारी अध्यक्ष उत्तर प्रदेश सिंधी अकादमी के मार्गदर्शन में किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य सिंधी भाषा को केवल संवाद और सांस्कृतिक पहचान तक सीमित न रखकर शिक्षा और रोजगार से जोड़ना है।
विशेषज्ञों ने कहा कि आठवीं अनुसूची में शामिल सिंधी भाषा भारत की प्राचीन और समृद्ध भाषाओं में से एक है। इसे सिविल सेवा अध्ययन जैसे करियरपरक विषय से जोड़ने पर युवाओं को दोहरा लाभ मिलेगा। वे अपनी मातृभाषा, संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहने के साथ ही भारतीय प्रशासनिक सेवा सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर सकेंगे।
इस पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद (एनसीपीएसएल), केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (सीएसयू), एसडब्ल्यूएस और उत्तर प्रदेश सिंधी अकादमी के आपसी सहयोग से विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया। इसे जुलाई 2027 से शुरू करने की योजना है। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने पाठ्यक्रम के विषयों, शैक्षणिक स्वरूप और रोजगार की संभावनाओं को लेकर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का संचालन सत्येंद्र भावनानी ने किया। अकादमी के निदेशक अभिषेक कुमार अखिल ने सभी अतिथियों, सिंधी विद्वानों, साहित्यकारों, लेखकों, शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि सिंधी भाषा का विकास केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित रहकर नहीं हो सकता, बल्कि इस तरह की कार्यशालाओं और व्यावहारिक प्रयासों से ही भाषा को नई पहचान और विस्तार मिलेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उत्तर प्रदेश सिंधी अकादमी भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास करती रहेगी।




