स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने के साथ मातृ मृत्यु दर घटाने पर जोर
बेहतर काम करने वाली चार सीएचसी सम्मानित
एआई के इस्तेमाल की भी दी सलाह
एनीमिया नियंत्रण के लिए नियमित जांच और गर्भवती महिलाओं की निगरानी पर जोर
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, मातृ मृत्यु दर में कमी लाने और एनीमिया पर नियंत्रण के लिए जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में जनपद स्तरीय बैठक हुई। इसमें आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ राजकीय और निजी चिकित्सालयों के बीच समन्वय बढ़ाने पर चर्चा की गई। एक माह में 77 हजार से अधिक ओपीडी होने पर जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग की टीम की सराहना की और सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार करने के निर्देश दिए।
बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाकर प्रदेश में बेहतर रैंकिंग हासिल करनी है। इसके लिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को टीम भावना के साथ ईमानदारी से काम करना होगा। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही अस्पतालों में साफ-सफाई, पेयजल और बिजली की व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए।
चार सीएचसी को मिला प्रशस्ति पत्र
स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर कार्य करने के लिए सीएचसी जयसिंहपुर, बल्दीराय, दूबेपुर और मोतिगरपुर को जिलाधिकारी ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि मरीजों को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा।
डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा
बैठक में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत मरीजों की आभा आईडी बनाने, आभा आधारित पंजीकरण, ई-प्रिस्क्रिप्शन, डिजिटल लैब रिपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार करने पर जोर दिया गया। इससे मरीजों के स्वास्थ्य संबंधी अभिलेख डिजिटल माध्यम से उपलब्ध हो सकेंगे और उपचार की प्रक्रिया अधिक सुगम एवं पारदर्शी बनेगी। अस्पतालों को हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (एचएफआर), हेल्थकेयर प्रोफेशनल रजिस्ट्री (एचपीआर) और एबीडीएम-सक्षम एचएमआईएस सॉफ्टवेयर के उपयोग की जानकारी भी दी गई।
गर्भवती महिलाओं की निगरानी और एनीमिया नियंत्रण प्राथमिकता
मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए गर्भवती महिलाओं का समय से पंजीकरण, नियमित प्रसवपूर्व जांच और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान पर विशेष जोर दिया गया। जटिल मामलों में समय से उपचार और रेफरल के साथ सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई। इसके लिए सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी चर्चा हुई।
वहीं, एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और अन्य लक्षित समूहों में रक्ताल्पता की समय से पहचान, हीमोग्लोबिन की नियमित जांच, आयरन एवं फोलिक एसिड की उपलब्धता और पौष्टिक आहार के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सीएमएस, आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक अमरदीप सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और सरकारी एवं निजी चिकित्सालयों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।




