403 सीटों पर कांग्रेस की तैयारी ने बढ़ाई सपा की चिंता, सीट बंटवारे पर सहमति के आसार अब भी मुश्किल
दूसरे दलों से आए नेताओं को तरजीह देने पर सपा में अंतर्कलह, बागी बिगाड़ सकते हैं अखिलेश यादव का सियासी गणित
लखनऊ उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
राजधानी लखनऊ विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक खंड चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन ने पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है। 11 सीटों में पांच पर जीत दर्ज करने के बाद सपा खेमे में उत्साह जरूर बढ़ा है, लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की राजनीतिक चुनौतियां कम होती नजर नहीं आ रही हैं। खासकर कांग्रेस के साथ गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर तस्वीर साफ न होने से सपा नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
लोकसभा चुनाव और उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनावों के अनुभव के बाद कांग्रेस भी अब अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
पार्टी की ओर से प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी किए जाने के संकेतों ने गठबंधन की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। यदि कांग्रेस अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने के अपने रुख पर कायम रहती है तो सपा के सामने सीटों के बंटवारे को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। ऐसे में अखिलेश यादव के लिए सहयोगी दलों के साथ तालमेल बैठाना आसान नहीं होगा।
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के भीतर भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को संगठन और चुनावी राजनीति में प्राथमिकता दिए जाने से पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं में असंतोष की स्थिति बन रही है। टिकट वितरण के समय यह नाराजगी खुलकर सामने आ सकती है। पार्टी से असंतुष्ट और बागी नेता चुनाव मैदान में उतरकर सपा के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं। इसका सीधा असर कई विधानसभा सीटों के चुनावी समीकरण पर पड़ने की आशंका है।
ऐसे में एमएलसी चुनाव की सफलता को विधानसभा चुनाव की जीत का संकेत मानना सपा के लिए जल्दबाजी हो सकती है। एक तरफ कांग्रेस के साथ गठबंधन की चुनौती, दूसरी तरफ संगठनात्मक असंतोष और बागियों का खतरा पार्टी के सामने है। वहीं कांग्रेस की प्रदेशव्यापी तैयारी ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। अब देखना होगा कि अखिलेश यादव गठबंधन, संगठन और टिकट वितरण के मोर्चे पर किस तरह संतुलन साधते हैं। इतना तय है कि आगामी विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस के रिश्ते और सपा के भीतर की सियासी खींचतान चुनावी नतीजों को प्रभावित करने वाले अहम कारक बन सकते हैं।




