सूफी संत की शिक्षाएं मोहब्बत, इंसानियत और भाईचारे का देती हैं पैगाम देवा शरीफ में गंगा-जमुनी तहजीब की दिखी झलक, अमन और सौहार्द का संदेश
उत्तर प्रदेश / etv news 24 ब्यूरो / एजेंसी लखनऊ
राजधानी लखनऊ हजरत हाजी वारिस अली शाह रहमतुल्लाह अलैह के सालाना उर्स के अवसर पर दुनियावी तलबगार के दीवाने और राष्ट्रीय सामाजिक कार्यकर्ता संगठन के संयोजक मोहम्मद आफाक, इमामिया एजुकेशन ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी मौलाना अली हुसैन कुम्मी तथा इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हाजी फहीम सिद्दीकी ने देवा शरीफ पहुंचकर अपनी अकीदत पेश की। तीनों ने सूफी संत की शिक्षाओं को याद करते हुए उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश किया और समाज में प्रेम, भाईचारे तथा धार्मिक सद्भाव को मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
इस मौके पर मोहम्मद आफाक ने कहा कि हजरत हाजी वारिस अली शाह की शिक्षाएं इंसानियत, मोहब्बत, आपसी भाईचारे और अमन का संदेश देती हैं। देवा शरीफ ऐसी रूहानी सरजमीं है, जहां हर साल विभिन्न धर्मों और वर्गों के लोग अकीदत के साथ पहुंचते हैं। यहां धर्म और मजहब की सीमाओं से ऊपर उठकर लोग रूहानी सुकून हासिल करते हैं। यह परंपरा समाज में आपसी विश्वास और सद्भाव को मजबूत करने की प्रेरणा देती है।
मौलाना अली हुसैन कुम्मी ने कहा कि हजरत हाजी वारिस अली शाह की दरगाह भारत की गंगा-जमुनी तहजीब और साझा संस्कृति की प्रमुख पहचान है। यहां विभिन्न धर्मों के मानने वाले लोग समान श्रद्धा और सम्मान के साथ हाजिरी देते हैं। यह भारत की उस सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है, जिसकी बुनियाद आपसी सम्मान, धार्मिक सहिष्णुता और एकता पर टिकी है। उन्होंने कहा कि देश की मजबूती के लिए इस विरासत को सहेजना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है।
हाजी फहीम सिद्दीकी ने कहा कि मौजूदा दौर में समाज को बांटने और लोगों के बीच नफरत व दूरियां बढ़ाने वाली कोशिशों के बीच सूफी संतों की शिक्षाएं और भी प्रासंगिक हो गई हैं। सूफी बुजुर्गों ने हमेशा इंसानियत की सेवा, आपसी प्रेम, सहिष्णुता और शांति का रास्ता दिखाया है। उनके विचारों को अपनाकर समाज में नफरत कम करने के साथ ही लोगों के बीच विश्वास और भाईचारे को मजबूत किया जा सकता है।
मोहम्मद आफाक ने आमजन से अपील की कि वे सूफी संतों की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारें, सभी धर्मों की भावनाओं का सम्मान करें और देश में अमन, मोहब्बत, सामाजिक सौहार्द तथा राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि आपसी सद्भाव और इंसानियत के रास्ते पर चलकर ही एक मजबूत, शांतिपूर्ण और समरस समाज का निर्माण किया जा सकता है।




