चुनावी वादों से आगे क्यों नहीं बढ़ी मंझना-कोरारी सड़क की कहानी, जनता मांग रही जवाब
सत्ता बदली, सरकारें बदलीं, नहीं बदली मंझना-कोरारी मार्ग की तस्वीर; जिम्मेदारी किसकी
दशकों से बदहाल मंझना-कोरारी मार्ग, विकास के दावों के बीच जनता पूछ रही जिम्मेदार कौन
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
सुलतानपुर/अमेठी सुलतानपुर और अमेठी जिले को जोड़ने वाला मंझना-कोरारी संपर्क मार्ग वर्षों से बदहाली का शिकार है। सड़क पर जगह-जगह उखड़े पत्थर, गड्ढे और धूल राहगीरों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में विकास और बेहतर सड़क व्यवस्था के दावे लगातार किए जाते रहे, लेकिन इस महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग की हालत आज भी जस की तस है। अब सड़क की बदहाली सिर्फ आवागमन की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही का राजनीतिक सवाल बनती जा रही है।
कुड़वार क्षेत्र से जुड़ा यह मार्ग दो जिलों के बीच आवागमन का महत्वपूर्ण माध्यम है। स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क दुरुस्त होने से आसपास के गांवों के लोगों को रोजगार, शिक्षा, कारोबार और औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी। इसके विपरीत वर्तमान स्थिति में लोगों को खराब रास्ते के कारण समय और ईंधन दोनों का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
चुनाव में सड़क का मुद्दा, चुनाव बाद क्यों भूल जाते हैं जिम्मेदार
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान गांवों की सड़कों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर तमाम वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव बीतने के बाद मंझना-कोरारी मार्ग जैसे मुद्दे प्राथमिकता सूची से बाहर हो जाते हैं। ग्रामीण अब सीधे सवाल कर रहे हैं कि आखिर वर्षों से लंबित इस सड़क के लिए जिम्मेदारी किसकी है और इसे बनवाने की पहल कौन करेगा।
अमेठी क्षेत्र को लम्बे समय तक वीआईपी क्षेत्र की पहचान मिलने के बावजूद दो जिलों को जोड़ने वाले इस मार्ग की बदहाली को लेकर लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इस सड़क को प्राथमिकता मिलती तो इसकी स्थिति इतनी खराब नहीं होती।
यहां सवाल किसी एक सरकार या एक जनप्रतिनिधि तक सीमित नहीं है। दशकों से सड़क की खराब स्थिति यह सवाल जरूर खड़ा करती है कि अलग-अलग कार्यकाल में जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या प्रयास किए? जनता अब आश्वासन के बजाय सड़क पर काम होते देखना चाहती है।
रक्षा प्रतिष्ठानों के क्षेत्र में कमजोर सड़क, विकास के दावों की परीक्षा
अमेठी क्षेत्र में एचएएल सहित रक्षा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान और औद्योगिक गतिविधियां हैं। ऐसे में आसपास के संपर्क मार्गों की बेहतर स्थिति औद्योगिक गतिविधियों के साथ-साथ स्थानीय रोजगार और आवागमन के लिए भी महत्वपूर्ण है।
ग्रामीणों का कहना है कि मंझना-कोरारी मार्ग का पुनरुद्धार होने पर सुलतानपुर और अमेठी के बीच आवागमन आसान होगा। युवाओं को रोजगार के अवसरों तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी और लोगों को लंबा चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।
सड़क की मौजूदा हालत को देखकर ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर इसी मार्ग पर साफ दिखाई देता है। एक तरफ सड़क सुधार और गड्ढामुक्त अभियान की बात होती है, दूसरी तरफ यह मार्ग वर्षों से मरम्मत की बाट जोह रहा है।
जनता का सवाल निरीक्षण और आश्वासन नहीं, कब होगा काम
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से सड़क का स्थलीय निरीक्षण कराकर उसकी तकनीकी स्थिति के आधार पर स्थायी पुनरुद्धार की मांग की है। लोगों का कहना है कि सिर्फ पैचवर्क या अस्थायी मरम्मत से समस्या का समाधान नहीं होगा।
अब क्षेत्रीय जनता की निगाहें लोक निर्माण विभाग के साथ-साथ संबंधित जनप्रतिनिधियों पर भी हैं। लोगों का सवाल है कि जब यह मार्ग दो जिलों को जोड़ता है और औद्योगिक व रक्षा प्रतिष्ठानों वाले क्षेत्र के आवागमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, तो इसके पुनरुद्धार के लिए ठोस पहल कब होगी।
मंझना-कोरारी मार्ग की बदहाली ने स्थानीय राजनीति में भी जवाबदेही बनाम विकास के दावों का सवाल खड़ा कर दिया है। अब जनता यह देखना चाहती है कि सड़क की समस्या को लेकर कौन जनप्रतिनिधि पहल करता है, विभाग कब प्रस्ताव तैयार करता है और धरातल पर निर्माण कार्य कब शुरू होता है।
फिलहाल सड़क पर बिखरे पत्थर और गड्ढे एक ही सवाल पूछ रहे हैं। वादों और दावों के बाद मंझना-कोरारी मार्ग के पुनरुद्धार की जिम्मेदारी आखिर कौन उठाएगा।




