तीन साल की तैनाती पूरी करने वाले अधिकारियों को हटाने की तैयारी, 30 नवंबर तक आयोग को भेजनी होगी रिपोर्ट
गृह जनपद में तैनाती पर रोक, पिछले विधानसभा चुनाव में तैनात रहे अफसरों की उसी क्षेत्र में दोबारा तैनाती नहीं
उत्तर प्रदेश / etv news24 ब्यूरो एजेंसी लखनऊ
राजधानी लखनऊ सूत्रों के मुताबिक मिली जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2027 को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र ढंग से संपन्न कराने के लिए आयोग ने निर्वाचन कार्य से सीधे जुड़े अधिकारियों के स्थानांतरण और तैनाती के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत निर्धारित अवधि से अधिक समय तक एक ही जिले में तैनात अधिकारियों को स्थानांतरित किया जाएगा। साथ ही, पिछले विधानसभा चुनाव या उसके बाद हुए उपचुनाव में तैनात रहे अधिकारियों की उसी विधानसभा क्षेत्र अथवा जिले में दोबारा तैनाती नहीं की जाएगी।
आयोग के निर्देशों के अनुसार, पिछले चार वर्षों की अवधि में 31 मई 2027 तक एक ही जिले में तीन वर्ष की सेवा पूरी करने वाले अधिकारियों को निर्धारित स्थानांतरण नीति के तहत हटाया जाएगा। संबंधित अधिकारियों के स्थानांतरण और नई तैनाती की समेकित रिपोर्ट मुख्य सचिव तथा पुलिस महानिदेशक के माध्यम से 30 नवंबर 2026 तक भारत निर्वाचन आयोग को भेजनी होगी।
डीएम से बीडीओ तक आएंगे स्थानांतरण के दायरे में
आयोग की स्थानांतरण नीति का दायरा व्यापक रखा गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, अपर जिलाधिकारी (एडीएम), उप जिलाधिकारी (एसडीएम), ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, तहसीलदार और खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) समेत निर्वाचन कार्य से सीधे जुड़े अधिकारियों पर यह नीति लागू होगी। मंडलायुक्त, नगर आयुक्त तथा नगर निगम और विकास प्राधिकरणों में कार्यरत संबंधित अधिकारी भी इसके दायरे में आएंगे।
पुलिस विभाग में उप निरीक्षक और उनसे उच्च रैंक के अधिकारियों के साथ आबकारी विभाग के उप निरीक्षक एवं उनसे ऊपर के अधिकारियों पर भी स्थानांतरण संबंधी निर्देश लागू होंगे। परिवहन विभाग के सब-इंस्पेक्टर और उनसे उच्च स्तर के क्षेत्रीय अधिकारी भी इस नीति के दायरे में शामिल किए गए हैं। इसका उद्देश्य चुनाव के दौरान किसी अधिकारी के लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में बने रहने से उत्पन्न होने वाली संभावित पक्षपात की आशंकाओं को दूर करना है।
गृह जनपद में तैनाती नहीं, पुराने चुनावी क्षेत्र में वापसी पर भी रोक
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि संबंधित अधिकारियों को उनके गृह जनपद में तैनात नहीं किया जाएगा। जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर तथा पुलिस इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर और उनसे उच्च रैंक के अधिकारियों की तैनाती में विशेष सतर्कता बरती जाएगी। इन्हें उस विधानसभा क्षेत्र या जिले में दोबारा तैनात नहीं किया जाएगा, जहां वे पिछले विधानसभा चुनाव अथवा उसके बाद हुए उपचुनाव के दौरान तैनात रहे थे।
हालांकि, राज्य मुख्यालयों में तैनात संबंधित विभागीय अधिकारियों और निर्वाचन कार्य से असंबद्ध तकनीकी कर्मचारियों को सामान्यतः इस नीति से छूट दी गई है। सेक्टर ऑफिसर और जोनल मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात अधिकारियों को भी सामान्यतः स्थानांतरण नीति से बाहर रखा गया है। इन अधिकारियों के कार्यों पर संबंधित निर्वाचन अधिकारियों और प्रेक्षकों (ऑब्जर्वर) की निगरानी रहेगी।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 31 मई 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को स्थानांतरण नीति से छूट दी जाएगी, लेकिन उन्हें निर्वाचन से जुड़े महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी। सभी संबंधित विभागों को निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। चुनाव से पहले अधिकारियों के स्थानांतरण की यह कवायद प्रशासनिक व्यवस्था को निष्पक्ष बनाने और निर्वाचन प्रक्रिया में जनता का भरोसा कायम रखने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।




