भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की सूची में 88वें नंबर पर दर्ज है नाम, पार्टी पदाधिकारियों ने जताई अनभिज्ञता
दातागंज के पूर्व विधायक की सपा में वापसी के बीच सूची ने खड़े किए सवाल
2027 के चुनाव से पहले यूपी की सियासत में चर्चा तेज, भाजपा की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार
उत्तर प्रदेश /etv News 24 / ब्योरो एजेंसी लखनऊ
राजधानी लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजनीति में सोमवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने भाजपा और समाजवादी पार्टी, दोनों के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी। बदायूं जिले की दातागंज विधानसभा सीट से पूर्व विधायक सिनोद कुमार शाक्य ने दिन में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की, जबकि शाम को जारी भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति-2026 की सूची में उनका नाम सदस्य के रूप में दर्ज मिला। सूची में 88वें नंबर पर नाम सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं। अब सवाल उठ रहा है कि यह सूची तैयार करने में चूक हुई या फिर पार्टी स्तर पर कोई अन्य वजह है।
अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा में हुए शामिल
सोमवार को लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में सिनोद शाक्य ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। उनके साथ बिसौली के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर और ब्लॉक प्रमुख कालीचरण उर्फ केसी शाक्य भी सपा में शामिल हुए। सपा में वापसी के बाद सिनोद शाक्य ने पार्टी को मजबूत करने और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने के लिए काम करने की बात कही।
भाजपा की सूची में नाम से बढ़ा असमंजस
इसी दिन शाम को भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति-2026 की सूची जारी हुई। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की ओर से जारी बताई जा रही सूची में कुल 712 नेताओं के नाम शामिल हैं। इनमें 30 स्थायी आमंत्रित, 134 विशेष आमंत्रित और 548 प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बताए गए हैं। इसी सूची में सिनोद शाक्य का नाम भी प्रदेश कार्यसमिति सदस्य के रूप में दर्ज है।
नाम सामने आने के बाद बदायूं भाजपा के पदाधिकारियों की प्रतिक्रियाओं ने मामले को और दिलचस्प बना दिया। भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव कुमार गुप्ता ने ऐसी सूची मिलने की जानकारी से इनकार किया, जबकि ब्रज क्षेत्र अध्यक्ष पूरन लाल लोधी ने भी सिनोद शाक्य के कार्यसमिति में शामिल होने की बात से अनभिज्ञता जताई। इसके बावजूद सूची में उनका नाम दर्ज होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस पूरे प्रकरण पर भाजपा की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।
सूची में दोहराए गए नामों ने भी उठाए सवाल
सूची में कथित तौर पर कुछ अन्य नामों के दोहराव की बात भी सामने आई है। आजमगढ़ के अखिलेश कुमार मिश्र उर्फ गुड्डू का नाम अलग-अलग क्रमांकों पर दर्ज होने और कृष्णपाल तथा श्रीकृष्ण पाल के नामों में समानता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन नामों के एक ही व्यक्ति से संबंधित होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बसपा से सपा और भाजपा होते हुए फिर सपा में वापसी
सिनोद कुमार शाक्य दातागंज विधानसभा सीट से वर्ष 2007 और 2012 में बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने सपा का रुख किया, लेकिन टिकट नहीं मिलने के बाद भाजपा में शामिल हो गए। अब एक बार फिर सपा में वापसी के बाद उनका नाम भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की सूची में दर्ज होने का मामला चर्चा का विषय बन गया है।
वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दल-बदल और संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर पहले से ही राजनीतिक सरगर्मी तेज है। ऐसे में एक ही दिन में दो अलग-अलग दलों से जुड़ी गतिविधियों के बीच नाम सामने आने से कई सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल यह स्पष्ट होना बाकी है कि भाजपा की सूची में नाम किसी तकनीकी या संपादकीय चूक का परिणाम है या इसके पीछे कोई अन्य कारण है। भाजपा की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।




