गंगा स्नान कर पितरों को किया नमन
सर्वपितृ अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने किया तर्पण और श्राद्ध
पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए गंगा तट पर हुए धार्मिक अनुष्ठान
हरिद्वार उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
सर्वपितृ अमावस्या के पावन अवसर पर शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को धर्मनगरी हरिद्वार के हर की पौड़ी घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। श्रद्धालुओं ने मां गंगा में पवित्र स्नान कर पुण्य लाभ की कामना की और अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। घाटों पर गंगा स्नान, तर्पण और श्राद्ध के धार्मिक अनुष्ठानों के बीच आस्था और भक्ति का माहौल दिखाई दिया।
पितरों के तर्पण और श्राद्ध का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में सर्वपितृ अमावस्या को पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन उन पूर्वजों का भी श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, जिनकी पुण्यतिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर नहीं हो पाता।
इसी मान्यता के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचकर अपने पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। श्रद्धालुओं ने गंगा तट पर विधि-विधान से तर्पण कर पूर्वजों की आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
मां गंगा में आस्था की डुबकी, पूर्वजों के प्रति जताई श्रद्धा
सर्वपितृ अमावस्या पर हर की पौड़ी का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। श्रद्धालुओं ने मां गंगा में स्नान कर पूजा-अर्चना की और अपने पूर्वजों का स्मरण किया। कई लोगों ने पुरोहितों के मार्गदर्शन में तर्पण और श्राद्ध कर्म संपन्न किए।
धार्मिक मान्यता है कि पितृपक्ष के अंतिम दिन पितरों का स्मरण, दान-पुण्य और तर्पण करने से पूर्वजों के प्रति कर्तव्य निभाने का अवसर मिलता है। इस अवसर पर गंगा स्नान के साथ श्रद्धालुओं ने भारतीय सनातन परंपरा, पारिवारिक संस्कारों और पितृ सम्मान की भावना को भी अभिव्यक्त किया। हर की पौड़ी पर उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर हरिद्वार की धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता को उजागर किया।




