2027 से पहले मायावती का बड़ा दांव, आकाश आनंद की वापसी से बसपा में फिर तेज होगी युवा राजनीति
BSP मेरे लिए परिवार है, किसी दल में नहीं जा रहा’, आकाश आनंद के इस संदेश के बाद मायावती ने लिया बड़ा फैसला
लखनऊ उत्तर प्रदेश/Etv News 24/संवाददाता वागीश
बहुजन समाज पार्टी में सोमवार को बड़ा सियासी उलटफेर हुआ। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद की बसपा में दोबारा वापसी का एलान कर दिया। इतना ही नहीं, उन्हें फिर से पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई है। मायावती के इस फैसले को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा की रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
मायावती ने कहा कि पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित में काफी सोच-विचार करने के बाद आकाश आनंद को दोबारा काम करने का मौका दिया जा रहा है। उन्होंने माना कि आकाश आनंद का पार्टी में कामकाज काफी हद तक ठीक रहा, लेकिन पिछले कुछ समय में उनसे जुड़े कुछ मामलों के चलते संगठन में कई बदलाव करने पड़े।
मायावती ने दिए संकेत- बदले हैं आकाश के तेवर
मायावती के मुताबिक, बाद के दौर में आकाश आनंद के व्यवहार और काम करने के तरीके में भी बदलाव देखने को मिला। हाल में एक्स पर आकाश आनंद की ओर से किए गए पोस्ट को भी मायावती ने महत्वपूर्ण संकेत माना। इसी पोस्ट में आकाश ने बसपा में दोबारा सक्रिय होकर काम करने की इच्छा जाहिर की थी।
आकाश आनंद ने मायावती को बताया राजनीतिक गुरु
आकाश आनंद ने अपनी पोस्ट में मायावती को अपना राजनीतिक गुरु, प्रेरणा और ‘बुआ मां’ बताते हुए अपने रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा कि राजनीति में उन्होंने जो कुछ सीखा, वह मायावती से ही सीखा और जो कुछ किया, उनके मार्गदर्शन में किया।
आकाश आनंद ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी विराम लगाने की कोशिश की। उन्होंने साफ कहा कि वह किसी दूसरे राजनीतिक दल में नहीं जा रहे हैं। उनके मुताबिक, बसपा उनके लिए सिर्फ पार्टी नहीं, बल्कि परिवार है।
2027 से पहले क्यों अहम है आकाश आनंद की वापसी
आकाश आनंद की दोबारा ताजपोशी ऐसे समय हुई है, जब बसपा 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को सक्रिय करने में जुटी है। पार्टी लंबे समय से अपने परंपरागत वोटबैंक के साथ युवा मतदाताओं और नई पीढ़ी तक पहुंच मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
ऐसे में आकाश आनंद की वापसी को मायावती के एक अहम राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। सोशल मीडिया और युवा वोटरों के बीच आकाश की सक्रियता को पार्टी चुनावी रणनीति में इस्तेमाल कर सकती है।
सियासी संदेश साफ- परिवार और संगठन के बीच फिर तालमेल
आकाश आनंद की वापसी से बसपा के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर चल रही चर्चाओं पर फिलहाल विराम लगता दिख रहा है। मायावती ने जिस तरह उन्हें दोबारा राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दी है, उससे संकेत है कि पार्टी नेतृत्व उन्हें एक बार फिर महत्वपूर्ण भूमिका में आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2027 के रण में आकाश आनंद की भूमिका कितनी बड़ी होगी और क्या उनकी वापसी बसपा की चुनावी रणनीति को नई धार दे पाएगी? आने वाले दिनों में संगठन में होने वाली नियुक्तियां और आकाश आनंद की सक्रियता इस सवाल का जवाब देंगी।




