डीडीयू उत्तर प्रदेश/ Etv News 24
2026-27 की पहली छमाही में परिणामी रेल दुर्घटना, ट्रेन के पटरी से उतरने, सिग्नल पार करने और समपार दुर्घटना के शून्य मामले
नियमित जांच, कर्मचारियों की सतर्कता और संभावित खामियों की समय रहते पहचान से संरक्षा व्यवस्था लगातार मजबूत
पूर्व मध्य रेल का पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल भारतीय रेल के अति व्यस्त रेल मंडलों में शामिल है। मंडल के महत्वपूर्ण रेल मार्गों में पंडित दीन दयाल उपाध्याय–मानपुर ग्रैंड कॉर्ड सेक्शन, सोन नगर–गढ़वा रोड तथा सासाराम–आरा रेलखंड शामिल हैं। इन महत्वपूर्ण मार्गों पर यात्री एवं मालगाड़ियों का लगातार आवागमन होता है और मंडल का ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के साथ भी इंटरफेस है। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से जुड़े महत्वपूर्ण रेल मार्गों के संगम क्षेत्र के रूप में पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल देश के प्रमुख रेल मार्गों और माल परिवहन नेटवर्क को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे व्यस्त और विविध रेल नेटवर्क वाले मंडल में संरक्षा को लगातार प्राथमिकता देते हुए नियमित जांच, सतत निगरानी, निर्धारित नियमों का पालन, कर्मचारियों की सजगता और संभावित आवश्यकताओं की समय रहते पहचान एवं सुधार पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। मंडल रेल प्रबंधक श्री उदय सिंह मीना के मार्गदर्शन में संरक्षा विभाग द्वारा मंडल के अन्य विभिन्न विभागों के साथ समन्वय के साथ इन व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है।
चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही, अर्थात अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान, मंडल में कोई परिणामी रेल दुर्घटना, मुख्य लाइन अथवा यार्ड में ट्रेन के पटरी से उतरने, सिग्नल को पार करने अथवा समपार फाटक पर दुर्घटना का मामला दर्ज नहीं हुआ। इसी अवधि में संरक्षा को प्रभावित करने वाली उपकरण विफलताओं की स्थिति भी शून्य रही। यह अवधि संरक्षा से जुड़े विभिन्न स्तरों पर नियमित निगरानी, जांच और निर्धारित प्रक्रियाओं के लगातार पालन को दर्शाती है।
संरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा संभावित तकनीकी आवश्यकताओं को गंभीर स्थिति बनने से पहले पहचानना और उन्हें पूरा करना है। पिछले दो वित्त वर्षों में वर्ष 2024-25 में 63 तथा वर्ष 2025-26 में 57, कुल 120 मामलों में संरक्षा जरूरत की समय रहते पहचान की गई और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई से संभावित दुर्घटना-जोखिम को गंभीर स्थिति बनने से पहले नियंत्रित करने में मदद मिली।
दुर्घटना मुक्त पूर्णतः संरक्षित रेल परिचालन में रेल कर्मियों की सतर्कता और सजगता सबसे महत्वपूर्ण है। फील्ड स्तर पर संरक्षा के प्रति ऐसी सजगता को प्रोत्साहित करने के लिए चालू वित्त वर्ष 2026-27 में विभिन्न विभागों के 19 रेलकर्मियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए मासिक संरक्षा पुरस्कार प्रदान किए गए हैं।
संरक्षा विभाग द्वारा मंडल में रेल परिचालन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों की नियमित और औचक जांच के माध्यम से संभावित संरक्षा जोखिमों की पहचान की जाती है तथा संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की समीक्षा की जाती है। इसी क्रम में अब तक 250 से अधिक गहन एवं औचक निरीक्षण किए गए हैं। इनमें स्टेशन और केबिन, समपार फाटक, फुटप्लेट निरीक्षण तथा एम्बुश और रात्रिकालीन जांच शामिल हैं। रात्रिकालीन जांच के दौरान ब्रेथ एनालाइजर से भी जांच की गई। इसके अलावा विभिन्न विभागों को साथ लेकर 5 क्रॉस-फंक्शनल संरक्षा ऑडिट किए गए हैं। चालू वर्ष में अग्नि सुरक्षा, मानसून के दौरान सावधानियां, शंटिंग सुरक्षा, वातानुकूलित कोचों की जांच तथा पॉइंट्स एवं क्रॉसिंग की जांच सहित 13 विशेष संरक्षा अभियान भी चलाए गए हैं।
रेल और सड़क यातायात की सुरक्षा के लिए मंडल के अंतर्गत आने वाले सभी 102 समपार फाटकों पर मानवयुक्त व्यवस्था है। इनमें 46 इंटरलॉक्ड तथा 56 नॉन-इंटरलॉक्ड समपार फाटक शामिल हैं। समपार फाटकों पर नियमों के पालन के साथ सड़क उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित तरीके से रेल लाइन पार करने के प्रति जागरूक करने के लिए भी लगातार अभियान चलाए जाते हैं।
आपातकालीन स्थिति में रेलवे और अन्य एजेंसियां मिलकर किस तरह काम करेंगी, इसकी तैयारी को परखने के लिए वर्ष 2025 में मंडल में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के साथ संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित की गई थी। गया में एनडीआरएफ की 9वीं बटालियन, पटना तथा डीडीयू में 11वीं बटालियन, वाराणसी के साथ आयोजित इन अभ्यासों में आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य, आपसी समन्वय और उपलब्ध संसाधनों की तैयारियों को परखा गया।
तकनीकी स्तर पर मंडल के सभी स्टेशनों पर ऐसी प्रणालियां चालू हैं जो ट्रेन के आने-जाने, सिग्नल और विद्युत आपूर्ति से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था में मदद करती हैं। इनमें बीपीएसी, आरआरआई/ईआई, एलईडी सिग्नल और आईपीएस प्रणाली शामिल हैं। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय समपार जागरूकता दिवस के अवसर पर पूरे मंडल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। पर्चे बांटने और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों को समपार फाटक पर सावधानी से रेल लाइन पार करने तथा अन्य जरूरी रेल सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक किया गया।
संरक्षा किसी एक समय में पूरा हो जाने वाला कार्य नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। मंडल में संरक्षा के लिए निवारक दृष्टिकोण अपनाते हुए संरक्षा संबंधी आवश्यकताओं की समय पर पहचान, नियमित समीक्षा और आवश्यक कार्रवाई पर विशेष जोर दिया जाता है। व्यस्त रेल नेटवर्क में बदलती परिस्थितियों, तकनीकी जरूरतों और परिचालन संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नियमों के पालन, निरीक्षण, जोखिम की पहचान, कर्मचारियों के प्रशिक्षण एवं काउंसलिंग और आवश्यक सुधार की प्रक्रिया निरंतर जारी रहती है। इसी सतत प्रक्रिया के तहत मंडल में संरक्षा व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा की जा रही है और आवश्यकता के अनुसार उन्हें और मजबूत किया जाता रहेगा, ताकि यात्रियों, रेलकर्मियों तथा माल परिवहन—सभी के लिए सुरक्षित रेल परिचालन सुनिश्चित रहे ।




