चार दशक के प्रशासनिक अनुभव के बाद सियासत में उतरे पूर्व CBI निदेशक, शिक्षा-स्वास्थ्य और रोजगार पर जोर
सनातन के साथ आधुनिक भारत का एजेंडा, काशी से शुरू हुई नागेश्वर राव की नई राजनीतिक पारी
वाराणसी उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
पूर्व सीबीआई निदेशक एम. नागेश्वर राव ने शनिवार को काशी से सक्रिय राजनीति में कदम रखने की घोषणा की। उन्होंने सर्वजन सनातन पार्टी (एसएसपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली है। पार्टी पदाधिकारियों ने उन्हें इस पद के लिए चुना। करीब चार दशक तक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और प्रशासन से जुड़े रहे नागेश्वर राव की राजनीतिक पारी की शुरुआत को नए राजनीतिक विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।नागेश्वर राव ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था को करीब से देखने के बाद अब अपने अनुभव का उपयोग देश और समाज के व्यापक हित में करने के उद्देश्य से राजनीति में आए हैं।
उन्होंने पार्टी के विजन में आधुनिक विकास और भारत की सभ्यतागत-सांस्कृतिक जड़ों के बीच संतुलन पर जोर दिया।उन्होंने ‘सत्य सनातन, नित्य नूतन’ को पार्टी की सोच का आधार बताते हुए कहा कि सनातन को केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार इसमें सत्य, धर्म, कर्तव्य, न्याय, करुणा और लोककल्याण जैसे मूल्य भी शामिल हैं।पार्टी ने अपने राजनीतिक एजेंडे में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सभ्यतागत पुनर्संपर्क को प्रमुख आधार बताया है।
शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने, स्वास्थ्य में आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुर्वेद की भूमिका और युवाओं-किसानों के लिए रोजगार व आजीविका के अवसरों पर जोर देने की बात कही गई है।काशी से शुरुआत का राजनीतिक संदेशनागेश्वर राव ने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत के लिए वाराणसी को चुना है। ऐसे में उनकी नई पार्टी का राजनीतिक विमर्श खास तौर पर सनातन, सांस्कृतिक विरासत, सुशासन और प्रशासनिक अनुभव के इर्द-गिर्द केंद्रित रहने के संकेत मिल रहे हैं।
हालांकि, पार्टी का चुनावी विस्तार, संगठनात्मक ढांचा और आगामी चुनावों में उसकी रणनीति अभी सामने आना बाकी है।पूर्व शीर्ष जांच अधिकारी के सीधे राजनीति में उतरने से यह भी स्पष्ट है कि नागेश्वर राव अब अपने प्रशासनिक अनुभव को राजनीतिक मंच के माध्यम से आगे बढ़ाना चाहते हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सर्वजन सनातन पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर किस तरह अपना संगठन खड़ा करती है और विभिन्न राज्यों की राजनीति में अपनी भूमिका किस रूप में तय करती है।




