डीजी (आईटी) डॉ. सीमा खन्ना की भूमिका पर विपक्ष ने मांगा जवाब
फॉर्म-6 में बदलाव और गोवा के 97 मतदाताओं का मामला फिर चर्चा में
नई दिल्ली/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
मतदाता सूचियों के प्रबंधन में चुनाव आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINET की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इसी क्रम में चुनाव आयोग की महानिदेशक (आईटी) डॉ. सीमा खन्ना की भूमिका और उनके अधीन तकनीकी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
डॉ. सीमा खन्ना को वर्ष 2025 में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) से चुनाव आयोग में लाया गया था।
विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि मतदाता पंजीकरण से जुड़े अधिकारियों की डिजिटल सिस्टम तक पहुंच सीमित करने के संबंध में चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी। आरोप है कि गोवा में मंजूरी प्राप्त 97 मतदाताओं के नाम भी मतदाता सूची में दर्ज नहीं हो सके। इस पूरे मामले को लेकर आयोग की डिजिटल व्यवस्था और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी ऑनलाइन फॉर्म-6 में कथित बदलाव को लेकर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आयोग के भीतर ही इस प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज की गई थी तो ऑनलाइन फॉर्म-6 में बदलाव किसके निर्देश पर किया गया और इसमें तकनीकी एजेंसी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की क्या भूमिका थी।
विपक्ष का कहना है कि मतदाता पंजीकरण जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में तकनीकी बदलावों की स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया और जवाबदेही तय होनी चाहिए। दूसरी ओर, इन आरोपों पर चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष और संबंधित तकनीकी प्रक्रिया का विस्तृत स्पष्टीकरण इस बहस में महत्वपूर्ण होगा।
ECINET चुनाव आयोग की डिजिटल सेवाओं और मतदाता संबंधी विभिन्न प्रक्रियाओं से जुड़ा प्लेटफॉर्म है। ऐसे में मतदाता पंजीकरण, फॉर्म-6 और अधिकारियों की सिस्टम तक पहुंच से जुड़े किसी भी विवाद का सीधा संबंध चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ता है। मामले को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की मांग कर रहा है।




