त्योहार पर आर्थिक संकट से जूझते रहे कर्मचारी
जिम्मेदारी तय करने की मांग
मिशन निदेशक के कामकाज पर उठे सवाल, विभागीय खींचतान की भी चर्चा
लखनऊ उत्तर प्रदेश/ Etv News 24 /संवाददाता वागीश
राजधानी लखनऊ प्रदेश में जहां दीपावली पर घर-घर दीप जल रहे थे और लोग खुशियां मना रहे थे, सूत्रों के मुताबिक मिली जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के करीब पांच हजार संविदाकर्मी वेतन न मिलने से आर्थिक संकट से जूझते रहे। आरोप है कि समय से वेतन जारी नहीं होने के कारण हजारों कर्मचारियों के परिवारों की दीपावली फीकी रह गई। कई कर्मचारियों के सामने त्योहार पर घर का खर्च चलाने तक की परेशानी खड़ी हो गई।

कर्मचारियों का आरोप है कि त्योहारों के मौके पर वेतन भुगतान में देरी की समस्या बार-बार सामने आती है। विभागीय स्तर पर फाइलों के लंबित रहने और भुगतान संबंधी स्वीकृतियों में देरी का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ता है।
कर्मचारियों का कहना है कि जब स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मियों को ही समय से वेतन नहीं मिलेगा तो उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति कैसे संभलेगी। उन्होंने समयबद्ध वेतन भुगतान और देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है।
मिशन निदेशक के कामकाज पर उठे सवाल
इस पूरे मामले के बीच एनएचएम की मिशन निदेशक आईएएस पिंकी जोयाल के कामकाज को लेकर भी विभागीय हलकों में चर्चाएं तेज हैं। कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि मिशन निदेशक ने अपने करीबी बताए जाने वाले डॉक्टर सूर्यांश ओझा को पद से हटा दिया है। इस फेरबदल के बाद विभाग में अंदरूनी खींचतान और कामकाज प्रभावित होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
हालांकि, वेतन भुगतान में देरी और इस प्रशासनिक फेरबदल के बीच सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कर्मचारियों का कहना है कि विभागीय व्यवस्थाओं और प्रशासनिक फैसलों के बीच सबसे अधिक परेशानी जमीनी स्तर पर काम करने वाले संविदाकर्मियों को उठानी पड़ रही है। अब सवाल यह है कि करीब पांच हजार कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदारी कौन तय करेगा और उन्हें बकाया वेतन कब तक मिलेगा।




