अब नोएडा जोन-1 की कमान संभालेंगी प्रीति यादव पिता चंडीगढ़ पुलिस में हेड कांस्टेबल
बेटी ने मेहनत और लगन से हासिल किया आईपीएस का मुकाम
बेटियों को बोझ समझने वालों के लिए मिसाल बनीं प्रीति, संघर्ष और सफलता की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत
उत्तर प्रदेश / etv news24 ब्यूरो नोएडा
कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और लक्ष्य हासिल करने का जुनून हो तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती। इस कहावत को आईपीएस अधिकारी प्रीति यादव ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से सच साबित कर दिखाया है। महज 22 साल की उम्र में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्रतिष्ठित परीक्षा पास कर आईपीएस अधिकारी बनने वाली प्रीति यादव अब नोएडा जोन-1 की पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
प्रीति यादव की सफलता की कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि उनके पिता चंडीगढ़ पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात रहे हैं। पुलिस विभाग से जुड़े परिवार में पली-बढ़ीं प्रीति ने अपने पिता के अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा से प्रेरणा लेते हुए देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में शामिल भारतीय पुलिस सेवा में जाने का सपना देखा। उन्होंने कठिन परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर तैयारी के दम पर कम उम्र में ही इस सपने को साकार कर दिखाया।
उनकी उपलब्धि उन बेटियों के लिए भी प्रेरणा है, जिन्हें आज भी समाज के कुछ हिस्सों में बोझ समझा जाता है। प्रीति ने साबित किया कि बेटियां अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर न केवल परिवार, बल्कि पूरे समाज और देश का नाम रोशन कर सकती हैं।
आज नोएडा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में डीसीपी के रूप में उनकी जिम्मेदारी युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणादायक संदेश है। उनकी कहानी बताती है कि सफलता किसी की पारिवारिक पृष्ठभूमि या परिस्थितियों की मोहताज नहीं होती, बल्कि मजबूत इरादों और मेहनत से इतिहास रचा जा सकता है।




