अमिताभ ठाकुर के साथ साजिश के आरोपों को नहीं मिला आधार, पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट का फैसला
घटना के समय जेल में बंद थे अतुल राय, फोन संपर्क या मुलाकात का भी नहीं मिला कोई प्रमाण
लखनऊ उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
राजधानी लखनऊ हजरतगंज आत्महत्या प्रकरण में घोसी के पूर्व सांसद अतुल राय को बड़ी राहत मिली है। लखनऊ की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने 23 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में एफआईआर संख्या 309/2021 से जुड़े मामले में अतुल राय की आरोपमुक्ति याचिका स्वीकार कर ली। इस मामले में पूर्व सांसद अतुल राय और पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के बीच कथित मिलीभगत और साजिश के आरोप लगाए गए थे।
विशेष न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि अतुल राय और अमिताभ ठाकुर के बीच किसी तरह की कथित साजिश या मिलीभगत को साबित करने वाला कोई ठोस साक्ष्य विवेचना में सामने नहीं आया। न्यायालय के समक्ष यह तथ्य भी आया कि कथित घटना के समय अतुल राय जेल में निरुद्ध थे। इसके अलावा उनके और अमिताभ ठाकुर के बीच फोन पर बातचीत, जेल में मुलाकात अथवा किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से संदेशों के आदान-प्रदान का भी कोई प्रमाण नहीं मिला।
न्यायालय ने टिप्पणी की कि विवेचक की ओर से मुख्य रूप से इस धारणा के आधार पर आरोपपत्र दाखिल किया गया था कि संबंधित आत्महत्या की घटना से अतुल राय को लाभ हो सकता था। हालांकि, किसी को संभावित लाभ मिलने की आशंका मात्र से आपराधिक साजिश साबित नहीं होती।
विशेष एमपी-एमएलए न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि अतुल राय के खिलाफ आरोप तय करने के लिए प्रथमदृष्टया पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इसी आधार पर अदालत ने उनकी आरोपमुक्ति याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें मामले में आरोपमुक्त कर दिया। न्यायालय के इस फैसले को पूर्व सांसद अतुल राय के लिए बड़ी कानूनी राहत के रूप में देखा जा रहा है।




