बारिश के बीच मजदूरों की हाजिरी दर्ज होने से व्यवस्था पर सवाल, क्या वास्तव में कार्यस्थलों पर पहुंचे थे श्रमिक
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
प्रतापपुर कमैचा चांदा ब्लाक के क्षेत्र में सुबह से हो रही लगातार बारिश के बावजूद मनरेगा के तहत श्रमिकों की हाजिरी दर्ज होने का मामला सामने आया है। बारिश के बीच मनरेगा की धुआंधार बैटिंग जारी रहने के सरकारी आंकड़ों ने निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि ऑनलाइन पोर्टल पर बड़े पैमाने पर मानव दिवस दर्ज होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी और भौतिक सत्यापन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आधिकारिक पोर्टल पर 30 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पीपी कमैचा विकासखंड की नौ ग्राम पंचायतों में मनरेगा के 17 कार्यों के सापेक्ष 76 मस्टर रोल जारी हुए और कुल 659 मानव दिवस दर्ज किए गए। इनमें देवाढ़, गडमाकोइरीपुर, गोपालपुर, खानपुर, कोथरा खुर्द, सदरपुर, साढ़ापुर और सोनावा सहित नौ ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
आंकड़ों के मुताबिक देवाढ़ में 145, गडमाकोइरीपुर में 100, गोपालपुर में 87, खानपुर में 32, कोथरा खुर्द में 60, सदरपुर में 42, साढ़ापुर में 60 और सोनावा में 34 मानव दिवस दर्ज किए गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सुबह से बारिश हो रही थी तो क्या इन ग्राम पंचायतों में मनरेगा के कार्य वास्तव में संचालित हो रहे थे? यदि श्रमिक काम कर रहे थे तो क्या उनके लिए सुरक्षित इंतजाम किए गए थे? बारिश और कीचड़ के बीच मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी?
अधिकारियों की निगरानी पर भी सवाल
मनरेगा में पारदर्शिता और कार्यों की वास्तविकता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत से लेकर विकासखंड स्तर तक के अधिकारियों की होती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या संबंधित अधिकारियों ने बारिश के दौरान कार्यस्थलों का निरीक्षण किया? क्या मौके पर मजदूरों की मौजूदगी की पुष्टि हुई और क्या ऑनलाइन दर्ज मस्टर रोल का भौतिक सत्यापन कराया गया?
जिला स्तर पर मनरेगा की निगरानी करने वाले जिम्मेदारों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आखिर बारिश के बीच इतनी बड़ी संख्या में मानव दिवस दर्ज होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों को इसकी वास्तविक स्थिति जानने की जरूरत महसूस हुई या नहीं।
हालांकि, केवल ऑनलाइन आंकड़ों के आधार पर किसी अनियमितता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए इन कार्यों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
मस्टर रोल का हो भौतिक सत्यापन, तभी सामने आएगी हकीकत
अब निगाहें खंड विकास अधिकारी पीपी कमैचा और जिला स्तर के मनरेगा अधिकारियों पर टिकी हैं। जरूरत है कि संबंधित ग्राम पंचायतों में दर्ज मस्टर रोल का मौके पर जाकर सत्यापन कराया जाए। श्रमिकों की वास्तविक उपस्थिति, कार्यों की स्थिति और भुगतान संबंधी अभिलेखों का मिलान किया जाए।
यदि जांच में बिना काम किए हाजिरी दर्ज कराने या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
बारिश में भी मनरेगा की यह धुआंधार बैटिंग आखिर किसकी निगरानी में चल रही है? सवाल यह भी है कि जब पोर्टल पर मानव दिवस दर्ज हो रहे थे तो जिला स्तर पर निगरानी करने वाले मनरेगा के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जमीनी हकीकत जानने की फुर्सत क्यों नहीं मिली? अब देखना होगा कि प्रशासन इन आंकड़ों की जांच कराता है या फिर यह मामला भी सरकारी पोर्टल के रिकॉर्ड तक ही सिमटकर रह जाता है।




