आठ बार के विधायक श्याम सुंदर शर्मा की कांग्रेस में वापसी, 2027 से पहले मांट में बढ़ी सियासी हलचल
मांट में टिकट का नया पेंच: कांग्रेस में शर्मा की एंट्री, सपा पहले ही संजय लाठर को दे चुकी है प्रत्याशी
भाजपा-रालोद के सामने कांग्रेस की नई चुनौती? शर्मा बोले- ‘अभी मैं जवान हूं’, मांट में शुरू हुई टिकट की चर्चा
लखनऊ उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
मथुरा/लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मथुरा की मांट विधानसभा सीट की सियासत में बड़ा बदलाव सामने आया है। आठ बार विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके श्याम सुंदर शर्मा ने कांग्रेस में वापसी कर ली है। शनिवार को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। कांग्रेस में उनकी वापसी ने मांट सीट पर संभावित राजनीतिक मुकाबले और विपक्षी गठबंधन के भीतर टिकट के समीकरण को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
श्याम सुंदर शर्मा का राजनीतिक सफर कांग्रेस से ही शुरू हुआ था। वर्ष 1989 में वह पहली बार कांग्रेस के टिकट पर मांट से विधायक बने और 1991 तथा 1993 में भी इसी पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ चुनावी सफर जारी रखा और मांट से आठ बार विधानसभा पहुंचे। वर्ष 2017 में बसपा के टिकट पर जीतकर उन्होंने आठवीं बार विधानसभा में प्रवेश किया था। 2022 में भाजपा के राजेश चौधरी ने उन्हें 9,580 मतों से पराजित किया।
कांग्रेस में लौटते ही 2027 के टिकट की चर्चा
शर्मा की वापसी का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल मांट सीट पर कांग्रेस की दावेदारी को लेकर उठ रहा है। वजह यह है कि विपक्षी खेमे में सीट को लेकर पहले से ही स्थिति पूरी तरह खुली नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक समाजवादी पार्टी ने मांट से डॉ. संजय लाठर को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। ऐसे में यदि कांग्रेस शर्मा को मांट से मैदान में उतारने की कोशिश करती है तो सपा-कांग्रेस गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे का सवाल महत्वपूर्ण हो सकता है।
यही वजह है कि शर्मा की कांग्रेस में वापसी को केवल एक नेता की पार्टी वापसी के बजाय 2027 के चुनावी समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि कांग्रेस ने अभी मांट से शर्मा की उम्मीदवारी की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
भाजपा के सामने मौजूदा विधायक की चुनौती, रालोद की भी नजर
2022 में भाजपा के राजेश चौधरी ने मांट सीट पर जीत दर्ज की थी। उन्हें 83,958 वोट मिले, जबकि श्याम सुंदर शर्मा 74,378 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे। रालोद के डॉ. संजय लाठर को भी 60,585 वोट मिले थे। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि मांट में मुकाबला पिछले चुनाव में बहुकोणीय रहा था।
मांट की राजनीति में रालोद की भी अहम भूमिका रही है। 2012 में जयंत चौधरी इस सीट से विधायक चुने गए थे।
अब 2027 से पहले रालोद और भाजपा के राजनीतिक समीकरण
कांग्रेस-सपा के बीच संभावित सीट बंटवारा और शर्मा की वापसी—तीनों घटनाक्रम मांट की चुनावी राजनीति को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक बन गए हैं।
अभी मैं जवान हूं’—बयान ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा
कांग्रेस में शामिल होने के बाद श्याम सुंदर शर्मा ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर भी संकेत दिए। उन्होंने कहा कि पिछली बार वह कम अंतर से हारे थे और अब भी राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। उनके ‘अभी मैं जवान हूं’ वाले बयान को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। रालोद नेता रोहित अग्रवाल ने इसी बयान को लेकर सवाल उठाते हुए मांट में सपा के घोषित प्रत्याशी और संभावित गठबंधन समीकरण का मुद्दा उठाया है।
शर्मा ने कांग्रेस में वापसी के बाद राहुल गांधी की राजनीति को ‘मानववाद’ से जोड़ते हुए कहा कि वह उनके संघर्ष में साथ देंगे। उन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम बताया।
अब निगाहें इस पर हैं कि 2027 में मांट सीट पर कांग्रेस का चेहरा कौन होगा और विपक्षी गठबंधन में सीट का बंटवारा किस तरह होता है। फिलहाल श्याम सुंदर शर्मा की वापसी ने मांट की सियासत में एक नया केंद्र जरूर बना दिया है—जहां कांग्रेस की वापसी की कोशिश, सपा की मौजूदा दावेदारी और भाजपा-रालोद के समीकरण आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।




