स्थानीय संस्कृति, खान-पान और शिल्प को मिलेगा मंच, ग्रामीणों व छोटे कारोबारियों के लिए खुलेंगे कमाई के नए रास्ते
चयनित गोशालाओं, कान्हा हाउस और बड़े गो-संरक्षण केंद्रों को क्षेत्र की विशेषता के अनुरूप विकसित करने की तैयारी
लखनऊ उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश कुमार
गो-संरक्षण के साथ अब गोशालाएं ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था का केंद्र भी बनेंगी। योगी सरकार चयनित गोशालाओं, कान्हा हाउस और बड़े गो-संरक्षण केंद्रों को क्षेत्र की संस्कृति, परंपरा और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप विकसित करने की तैयारी में है। इन केंद्रों को गो-पर्यटन से जोड़कर ग्रामीणों, स्थानीय कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों और छोटे कारोबारियों के लिए आय के नए अवसर तलाशे जाएंगे। यहां आने वाले लोगों को गो-संरक्षण के साथ गांव की जीवनशैली, लोक परंपराओं और स्थानीय उत्पादों से परिचित कराने की योजना है।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, प्रस्तावित मॉडल में गोशालाओं को केवल पशु संरक्षण तक सीमित न रखकर उन्हें स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। क्षेत्र की विशेषता के अनुसार अलग-अलग गतिविधियां विकसित की जाएंगी। कहीं लोक संस्कृति और पारंपरिक कला को प्रमुखता दी जा सकती है तो कहीं स्थानीय खान-पान, शिल्प, पशुपालन और ग्रामीण जीवनशैली को पर्यटन गतिविधियों का हिस्सा बनाया जा सकता है।
मांगलिक कार्यक्रमों के लिए भी विकसित होंगे स्थल
चयनित गोशालाओं में मांगलिक और सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन की सुविधाएं विकसित करने की भी तैयारी है। ग्रामीण परिवेश में पारंपरिक आयोजनों के लिए ऐसे स्थलों को तैयार किया जाएगा, जहां आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों। इससे गोशालाओं का उपयोग संरक्षण गतिविधियों के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए भी हो सकेगा। आयोजनों से जुड़े स्थानीय व्यवसायों को भी काम मिलने की संभावना है।
गो-पर्यटन का मॉडल सभी गोशालाओं में एक जैसा नहीं होगा। स्थानीय परिस्थितियों और क्षेत्र की विशेष पहचान के आधार पर सुविधाएं और गतिविधियां तय की जाएंगी। इसका उद्देश्य स्थानीय संस्कृति को पर्यटन से जोड़कर गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
ग्रामीणों, कारीगरों और छोटे कारोबारियों को मिलेगा अवसर
गो-पर्यटन विकसित होने पर इसका लाभ गोशाला परिसर तक सीमित नहीं रहेगा। आसपास के ग्रामीणों, स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों, छोटे दुकानदारों और खान-पान से जुड़े कारोबारियों के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने पर स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और पारंपरिक खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की संभावना है।
गोशालाओं के आसपास स्थानीय उत्पादों और ग्रामीण कला को प्रदर्शित करने के लिए स्थान विकसित किए जाने पर गांव की विशिष्ट पहचान को भी सामने लाया जा सकेगा। इस तरह गोशाला ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के बीच कड़ी का काम कर सकती है।
कान्हा हाउस और बड़े गो-संरक्षण केंद्र भी होंगे विकसित
श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गो-संरक्षण केंद्रों को नया स्वरूप देने की रणनीति तैयार की जा रही है। चयनित गोशालाओं के साथ कान्हा हाउस और बड़े गो-संरक्षण केंद्रों को भी इस योजना से जोड़ने की तैयारी है। संरक्षण की मूल भूमिका को बनाए रखते हुए इन केंद्रों की गतिविधियों का दायरा बढ़ाया जाएगा।
योजना के तहत गांव आने वाला व्यक्ति केवल गोशाला देखने तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण जीवन का अनुभव भी कर सके। क्षेत्र विशेष की पहचान को केंद्र में रखकर तैयार होने वाले ये मॉडल आने वाले समय में ग्रामीण पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित किए जा सकते हैं।




