नागरिक समाज और राजनीतिक विश्लेषकों का आरोप है कि सरकार की नीतियां समाज में असंतोष और विभाजन पैदा कर रही हैं।
पांच राज्यों के आगामी चुनावों को देखते हुए सरकार अब बैकफुट पर है और नियमों पर ‘कोर्स करेक्शन’ करने की तैयारी में है
नीतिगत विफलता या चुनावी डर?
UGC विवाद और SC-ST नीतियों पर चौतरफा घिरी मोदी सरकार
संवाददाता वागीश कुमार
नई दिल्ली/ Etv News 24
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के विवादित ‘इक्विटी विनियम 2026’ और एससी-एसटी से जुड़ी नीतियों को लेकर मोदी सरकार की नीतियां एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में हैं। आलोचकों और विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार की प्रशासनिक अदूरदर्शिता के कारण देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में अराजकता और सामाजिक टकराव की स्थिति पैदा हो गई है
सुप्रीम कोर्ट की फटकार और सरकार का यू-टर्न
जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन नियमों पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद सरकार की भारी किरकिरी हुई थी।
अदालत ने इन नियमों को प्रथम दृष्टया ‘अस्पष्ट’ और ‘विनाशकारी परिणामों’ वाला बताया था।
चौतरफा दबाव के बाद, अब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार किया है कि वह इन गाइडलाइंस पर ‘पुनर्विचार’ कर रही है।
विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार बिना किसी व्यापक परामर्श या तैयारी के जल्दबाजी में कड़े नियम थोप देती है, जिससे समाज का हर वर्ग खुद को असुरक्षित महसूस करने लगता है।
सवर्ण समाज का आक्रोश और ‘रोलबैक’ की गूंज
उत्तर भारत के कई राज्यों में सरकार की इस नीति के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में हुई महापंचायतों में वक्ताओं ने सरकार की कड़ी निंदा की।
एकतरफा नियमों का आरोप: प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि इन नियमों में सामान्य वर्ग के छात्रों और प्रोफेसरों के संरक्षण को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है, जिससे झूठे मुकदमों का खतरा बढ़ गया है।
वोट बैंक की राजनीति
आलोचकों का सीधा आरोप है कि सरकार केवल चुनावी लाभ के लिए सामाजिक ताने-बाने के साथ खिलवाड़ कर रही है।
चुनाव से ठीक पहले ‘बैकफुट’ पर सरकार
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सरकार इस मुद्दे पर अपनी किरकिरी से घबरा गई है।
आगामी विधानसभा चुनावों में होने वाले भारी नुकसान के डर से सरकार अब नवंबर तक इन विवादित नियमों को वापस लेने ( रोलबैक ) की गुप्त योजना बना रही है। विपक्ष ने तंज कसते हुए कहा है कि यह ‘जनता का हित’ नहीं, बल्कि पूरी तरह से ‘
चुनावी हार का डर’ है जिसके कारण सरकार को झुकना पड़ रहा है
निष्कर्ष: मोदी सरकार की इस नीति को उसकी एक और बड़ी प्रशासनिक विफलता के रूप में देखा जा रहा है। आलोचकों का मानना है कि जब तक सरकार अपनी कार्यशैली में सुधार कर सभी पक्षों को विश्वास में नहीं लेती, तब तक देश में इस प्रकार के नीतिगत संकट और सामाजिक असंतोष की स्थिति बनी रहेगी।




