कांग्रेस के सियासी गढ़ से अखिलेश का बड़ा दांव
PDA के जरिए सामाजिक समीकरणों को साधने की कवायद रथ पर
आंबेडकर-लोहिया-मुलायम की तस्वीरें, 2027 के लिए संगठन और वोटबैंक दोनों को साधने का संदेश
रायबरेली उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश कुमार
उत्तर प्रदेश रायबरेली उत्तर प्रदेश की सत्ता के लिए 2027 का सियासी रण अभी दूर है, लेकिन समाजवादी पार्टी ने इसकी तैयारी का ताप बढ़ा दिया है। अखिलेश यादव ने रायबरेली से PDA रथयात्रा का आगाज कर चुनावी अभियान का शंखनाद कर दिया। बछरावां क्षेत्र के चुरूवा से रथ पर सवार होकर निकले अखिलेश ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों का अभिवादन स्वीकार किया।
रायबरेली का चुनावी मैदान चुनकर सपा ने अपने अभियान को अलग राजनीतिक धार देने की कोशिश की है। कांग्रेस की मजबूत मौजूदगी वाले इस इलाके से PDA रथ को रवाना कर अखिलेश यादव ने पार्टी के कार्यकर्ताओं को सीधे चुनावी मोड में लाने का संदेश दिया। अब इस अभियान का असली लक्ष्य PDA के सामाजिक समीकरण को बूथ तक पहुंचाना और संगठन को चुनाव के लिए सक्रिय करना है।
PDA के सहारे सियासी मोर्चेबंदी
सपा की रणनीति में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को एक साझा राजनीतिक मंच के रूप में पेश करना प्रमुख मुद्दा है। PDA रथ पर डॉ. भीमराव आंबेडकर, डॉ. राममनोहर लोहिया, जनेश्वर मिश्र, मुलायम सिंह यादव और बेनी प्रसाद वर्मा की तस्वीरें लगाकर पार्टी ने अपने सामाजिक और वैचारिक संदेश को सामने रखा है।
यानी रथ सिर्फ यात्रा का माध्यम नहीं, बल्कि सपा के राजनीतिक संदेश का चलता-फिरता मंच भी बनाया गया है। अखिलेश यादव के इस अभियान में संगठन, सामाजिक न्याय और PDA के मुद्दों को एक साथ आगे बढ़ाने की रणनीति दिखाई दे रही है।
रायबरेली से निकला रथ, लखनऊ तक पहुंचाने की कोशिश रायबरेली लोकसभा सीट से राहुल गांधी सांसद हैं। ऐसे में सपा द्वारा इसी इलाके से अपने बड़े राजनीतिक अभियान की शुरुआत ने विपक्षी खेमे की राजनीति और 2027 के संभावित समीकरणों को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
सपा और कांग्रेस के बीच 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर गठबंधन तथा सीटों के बंटवारे की तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में रायबरेली से अखिलेश का PDA रथ निकालना अपने आप में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
सपा का संदेश साफ है—2027 की तैयारी अब केवल बैठकों और बयानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सड़क और संगठन दोनों स्तर पर दिखाई देगी। रायबरेली से निकला PDA रथ आगे किन इलाकों तक पहुंचता है और इसका राजनीतिक असर कितना व्यापक होता है, यह आने वाले महीनों में साफ होगा।




