OBC मुस्लिम जातियों के लिए अलग कोटे और कर्पूरी फार्मूले की मांग, चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर आंदोलन तेज करने का एलान किया
लखनऊ उत्तर प्रदेश/Etv News 24/संवाददाता वागीश कुमार
राजधानी लखनऊ मुस्लिम समाज की पिछड़ी और दलित जातियों के शैक्षिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक अधिकारों को लेकर सियासत गरमा गई है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव और आजमगढ़ से सांसद धर्मेंद्र यादव को होटल फॉर्च्यून में चार सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपने के बाद नुरुल हुदा, प्रदेश अध्यक्ष यूथ, ने विभिन्न राजनीतिक दलों पर निशाना साधा। उन्होंने मुस्लिम पिछड़ी जातियों को लंबे समय से वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाते हुए ‘अरज़ाल आयोग’ के गठन की मांग उठाई।
नुरुल हुदा ने कहा कि आजादी के करीब आठ दशक बाद भी कुरैशी, मंसूरी, बहेलिया, जुलाहा, ढफाली, मुस्लिम माली, बख्खो, दर्जी, गौरी, भाट, रंगरेज, तेली, चिकवा, पमरिया, नट, कोईरी और इराकी समेत कई मुस्लिम जातियां सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक पिछड़ेपन से जूझ रही हैं। उन्होंने कहा कि इन समुदायों के पारंपरिक रोजगार पर संकट बढ़ा है और राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी अपेक्षाकृत सीमित रहा है।
उन्होंने सपा, कांग्रेस, भाजपा और बसपा पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को अब इन समुदायों को केवल चुनावी गणित के नजरिए से देखने के बजाय उनकी वास्तविक समस्याओं और संवैधानिक अधिकारों पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
नुरुल हुदा ने कहा कि सच्चर कमेटी, रंगनाथ मिश्र आयोग और अन्य रिपोर्टों में मुस्लिम समाज के पिछड़ेपन से जुड़े मुद्दे सामने आते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश यादव, राहुल गांधी समेत अन्य राजनीतिक दलों के नेता मुस्लिम पिछड़ी जातियों की राजनीतिक भागीदारी और संवैधानिक अधिकारों के सवाल पर गंभीरता नहीं दिखाते हैं तो लोकतांत्रिक तरीके से सड़क से लेकर विधानसभा और संसद तक आवाज उठाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के कार्यालयों और सार्वजनिक मंचों पर सवाल पूछकर यह जानने का प्रयास जारी रहेगा कि इन समुदायों को सामाजिक न्याय और राजनीतिक हिस्सेदारी कब मिलेगी।
ये हैं प्रमुख मांगें
नुरुल हुदा ने संविधान के अनुच्छेद 341(3) में धार्मिक प्रतिबंध हटाने, मुस्लिम दलित जातियों के शैक्षिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास के लिए अरज़ाल आयोग गठित करने, मुस्लिम पमरिया समेत छूटी हुई जातियों को उत्तर प्रदेश की OBC सूची में शामिल करने की मांग की।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश में बिहार की तर्ज पर कर्पूरी फार्मूला लागू करने तथा 27 प्रतिशत OBC आरक्षण में मुस्लिम OBC के लिए 8.44 प्रतिशत अलग कोटा निर्धारित करने की मांग भी रखी।




