तीन दलों के बीच वोटों के बंटवारे का नया सवाल, 2022 के आंकड़े दे रहे बड़े संकेत
बसपा ने पहले ही खोला पत्ता, सपा-भाजपा के प्रत्याशी घोषित होने से पहले बढ़ाई चुनावी हलचल
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश/Etv News 24/संवाददाता वागीश कुमार
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की दस्तक से पहले सुल्तानपुर सदर सीट पर बहुजन समाज पार्टी ने प्रत्याशी घोषित कर चुनावी बिसात पर अपनी चाल चल दी है* बसपा प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने सोमवार को सुल्तानपुर विधानसभा क्षेत्र संख्या-188 से इम्तियाज अहमद उर्फ भुट्टो को प्रभारी और प्रत्याशी घोषित किया। प्रत्याशी के नाम के एलान के साथ ही सदर सीट के राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।सदर सीट पर बसपा के इस कदम को इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में यहां भाजपा, बसपा और सपा के बीच वोटों का अंतर बहुत बड़ा नहीं रहा था। 2022 में भाजपा प्रत्याशी को करीब 36.44 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि बसपा को 26.52 और सपा को 26.26 प्रतिशत वोट मिले। ऐसे में 2027 के चुनाव में प्रत्याशियों के चयन के साथ-साथ वोटों का बिखराव और सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बसपा ने पहले ही खोल दिया पत्ता
बसपा प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल सोमवार दोपहर सुल्तानपुर पहुंचे। अंबेडकर पार्क में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद तिकोनिया पार्क में मीडिया से बातचीत की। इसी दौरान इम्तियाज अहमद भुट्टो को सदर सीट से प्रत्याशी घोषित किया गया। पार्टी की ओर से बताया गया कि नाम पर राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के निर्देश के बाद मुहर लगी है।बसपा ने जिले में चुनावी तैयारी के लिहाज से पहले ही लंभुआ से शैलेंद्र सिंह और जयसिंहपुर सदर से मधुबाला वर्मा को प्रत्याशी घोषित कर रखा है। अब सुल्तानपुर सदर सीट पर भी चेहरा सामने आने के बाद पार्टी ने जिले की चारों सीटों पर संगठन को सक्रिय करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। इसौली और कादीपुर सीटों पर भी जल्द प्रत्याशी घोषित करने की बात प्रदेश अध्यक्ष ने कही है।
दलित-मुस्लिम समीकरण पर निगाह
इम्तियाज अहमद भुट्टो के नाम की घोषणा के बाद सदर सीट पर दलित और मुस्लिम मतदाताओं के बीच संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि चुनाव अभी दूर है और सभी प्रमुख दलों के प्रत्याशी सामने नहीं आए हैं, इसलिए किसी भी सामाजिक समूह के वोट व्यवहार को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा।बसपा का अपना पारंपरिक दलित आधार रहा है। ऐसे में मुस्लिम प्रत्याशी के साथ दलित आधार को जोड़ने की रणनीति के रूप में इस घोषणा को देखा जा रहा है। दूसरी ओर, सपा की ओर से अभी प्रत्याशी घोषित नहीं होने के कारण विपक्षी खेमे में भी उम्मीदवार चयन को लेकर राजनीतिक महत्व बढ़ गया है।
सपा के लिए भी बढ़ सकती है चुनौती
बसपा प्रदेश अध्यक्ष ने प्रेसवार्ता में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पीडीए राजनीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पीडीए को लेकर सवाल उठाते हुए इसे ‘धोखा’ बताया। साथ ही कहा कि बसपा 2007 की तर्ज पर ‘जनता का गठबंधन’ तैयार कर 2027 में अकेले चुनाव लड़ेगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेश की राजनीति में विपक्षी दलों के बीच सामाजिक समीकरणों को लेकर लगातार दावे किए जा रहे हैं।
सदर सीट के पिछले चुनावी आंकड़े बताते हैं कि यहां बसपा और सपा दोनों का वोट आधार महत्वपूर्ण रहा है।
ऐसे में बसपा के अलग चुनाव लड़ने की स्थिति में दोनों दलों के बीच वोटों के संभावित बंटवारे को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा स्वाभाविक है। हालांकि वास्तविक प्रभाव 2027 में प्रत्याशियों, स्थानीय मुद्दों और चुनावी अभियान के बाद ही स्पष्ट होगा।भाजपा के सामने गढ़ बचाने की चुनौतीसदर सीट पर भाजपा का प्रदर्शन पिछले चुनाव में मजबूत रहा था। 2022 में भाजपा प्रत्याशी ने बसपा और सपा प्रत्याशियों से पर्याप्त अंतर से जीत दर्ज की थी। अब बसपा ने समय से पहले प्रत्याशी उतारकर चुनावी तैयारी शुरू कर दी है, जबकि सपा और भाजपा की ओर से सदर सीट के लिए आधिकारिक प्रत्याशी का एलान अभी बाकी है।ऐसे में आने वाले दिनों में प्रत्याशियों की तस्वीर साफ होने के साथ सदर सीट का मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। किस दल का प्रत्याशी किन सामाजिक समूहों के बीच पकड़ बना पाता है, स्थानीय मुद्दे किस दिशा में जाते हैं और विभिन्न दलों के वोट आधार में कितना बदलाव आता है—इन सवालों के जवाब चुनावी अभियान के दौरान सामने आएंगे।चारों सीटों पर बसपा की तैयारी तेजविश्वनाथ पाल ने यह भी संकेत दिया कि बसपा जिले की सभी विधानसभा सीटों पर चुनावी तैयारी को तेज कर रही है। लम्भुआ और जयसिंहपुर सदर के बाद अब सुल्तानपुर सदर में प्रत्याशी घोषित हो चुका है। इसौली और कादीपुर पर भी जल्द नाम सामने आने की बात कही गई है। ऐसे में बसपा ने फिलहाल प्रत्याशी चयन के मामले में अन्य प्रमुख दलों से बढ़त लेते हुए जिले की चुनावी चर्चाओं को नई दिशा दे दी है। इम्तियाज भुट्टो की घोषणा के बाद अब निगाहें भाजपा और सपा के प्रत्याशी चयन पर टिक गई हैं। सदर सीट पर 2022 के करीबी दूसरे-तीसरे स्थान के आंकड़े और विभिन्न दलों के सामाजिक आधार को देखते हुए 2027 की चुनावी बिसात पर प्रत्याशियों की भूमिका अहम रहने वाली है।




