तिलौथू रोहतास/ Etv News 24
मां की पुण्यतिथि पर 107वीं बार रक्तदान कर गौरव राय ने मानव सेवा के प्रति अपने समर्पण की मिसाल पेश की। उनका कहना है कि जरूरतमंदों की सेवा से बढ़कर कोई पुण्य कार्य नहीं है। मां की स्मृति में रक्तदान करते हुए उन्होंने कामना की कि आराध्य उन्हें इसी तरह स्वस्थ रखें, ताकि जीवनभर जरूरतमंदों की मदद करते रहें।गौरव राय की पहचान सिर्फ नियमित रक्तदाता के रूप में ही नहीं, बल्कि कोरोना काल में जरूरतमंद मरीजों के लिए किए गए सेवा कार्यों के कारण ‘ऑक्सीजन मैन’ के रूप में भी बनी। कोरोना संक्रमण के भयावह दौर में जब अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी जरूरत थी और मरीजों के परिजन ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए परेशान होकर इधर-उधर भटक रहे थे, तब गौरव राय ने आगे बढ़कर लोगों की मदद की।उन्होंने जरूरतमंद मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था कराने के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर उसे मरीजों तक पहुंचाने में भी सहयोग किया। उस कठिन दौर में कई परिवारों के लिए समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध होना जीवन और मृत्यु के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुआ। लगातार आने वाली फोन कॉल और मदद की गुहार के बीच उन्होंने अपनी टीम के साथ लोगों तक हरसंभव सहायता पहुंचाने का प्रयास किया। उनकी इसी सेवा भावना ने उन्हें लोगों के बीच ‘ऑक्सीजन मैन’ की पहचान दिलाई।सामाजिक सरोकारों से जुड़े गौरव राय ने सैकड़ों जरूरतमंद महिलाओं को सिलाई मशीन उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया है। वहीं, स्कूली छात्र-छात्राओं को साइकिल उपलब्ध कराकर शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग किया।अपनी बेबाक और दो टूक बात रखने के लिए भी गौरव राय की अलग पहचान है। वे सही बात को सामने रखने में संकोच नहीं करते। साथ ही सहकर्मियों और जरूरतमंद लोगों के सुख-दुःख में खड़े रहने की भावना रखते हैं।मां की पुण्यतिथि पर 107वीं बार किया गया रक्तदान उनके लिए महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि निरंतर मानव सेवा के संकल्प का प्रतीक है। उनका यह प्रयास लोगों को रक्तदान और सामाजिक सेवा के लिए प्रेरित करने वाला है।




