BLO, सामान्यतः नहीं होगी सुनवाई
दिल्ली में दावे-आपत्तियों की समयसीमा 30 अक्टूबर तक बढ़ी
महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर; बैठकों की कार्यवाही भी होगी सार्वजनिक
आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले भेजना अनिवार्य
अफसरों की विदेश यात्राओं पर मंजूरी जरूरी; कैबिनेट सचिव को पत्र पर भी सफाई
नई दिल्ली/ Etv News 24/संवाददाता वागीश कुमार
नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे सवालों के बीच निर्वाचन आयोग ने शनिवार को हुई बैठक में कई अहम फैसले लिए। आयोग ने कहा है कि SIR के दौरान जिन मतदाताओं को नाम के अनमैप्ड होने या अन्य तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस मिला है, उनके घर बूथ लेवल अधिकारी (BLO) जाकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे।
इसके बाद दस्तावेज ECINET पर अपलोड किए जाएंगे और संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) निर्णय लेंगे। ऐसे मतदाताओं को सामान्य परिस्थितियों में ERO/AERO कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल अपवाद स्वरूप मामलों में सुनवाई होगी और उसे भी प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन कराने की बात आयोग ने कही है।
आयोग ने SIR में Form-6 के साथ घोषणा-पत्र की व्यवस्था को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। चुनाव आयोग के मुताबिक Form-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है और SIR से संबंधित प्रावधान अलग घोषणा-पत्र के रूप में हैं। आयोग ने पहले भी स्पष्ट किया था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप यह प्रक्रिया जारी है।
दावे-आपत्तियों की समयसीमा बढ़ी
दिल्ली में SIR से संबंधित दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है, जबकि इनके निस्तारण की समयसीमा 30 नवंबर तक बढ़ाई गई है। महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर और निस्तारण की समयसीमा 10 नवंबर निर्धारित की गई है।
आयोग ने कहा कि SIR के दौरान छूटे मतदाताओं, युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले पात्र लोगों को निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत संबंधित ERO के माध्यम से मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का अवसर मिलेगा। जरूरतमंदों के लिए सहायता केंद्र और विशेष शिविर लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बैठकों में पारदर्शिता के लिए नए निर्देश
निर्वाचन आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए। अब आयोग की प्रत्येक बैठक का एजेंडा पहले ही प्रसारित किया जाएगा और बैठक की कार्यवाही (मिनट्स) जारी की जाएगी।
सभी अधिकारियों की वार्षिक कार्य निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR) हर वर्ष निर्धारित समय सीमा के भीतर यानी 31 दिसंबर तक पूरी करने का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए अब निर्वाचन आयोग की मंजूरी आवश्यक होगी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आयुक्तों की ओर से अधिकारियों को दिए गए सभी निर्देशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।
कैबिनेट सचिव को पत्र पर आयोग की सफाई
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दे पर भी आयोग ने स्पष्टीकरण दिया है। आयोग के मुताबिक कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र किसी आईटी नीति से संबंधित नहीं था, बल्कि आयोग में प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था। आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारी की ओर से जारी कार्य-पुनर्विन्यास संबंधी आदेशों को दो आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किया गया था। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आईटी प्रभाग की निगरानी उप निर्वाचन आयुक्त से वापस नहीं ली गई थी।
आयोग ने 26 सितंबर की बैठक में लिए गए फैसलों को पूर्ण आयोग की मंजूरी से लिया गया निर्णय बताया है।




