पूर्व अटॉर्नी जनरल बोले- संवैधानिक संस्थाओं को विवादों में घसीटना उचित नहीं
विपक्ष के प्रस्तावित कदम पर कानूनी बहस तेज, चुनाव आयोग की भूमिका पर भी चर्चा
नई दिल्ली/ Etv News 24/संवाददाता वागीश कुमार
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की ओर से महाभियोग लाने की प्रस्तावित कोशिश पर देश में राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। इस बीच देश के पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने इस पहल को असंवैधानिक और आधारहीन करार दिया है।
मुकुल रोहतगी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को संविधान के तहत विशेष संरक्षण प्राप्त है और उनके खिलाफ कार्रवाई की एक निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया है। उनके अनुसार, केवल राजनीतिक असहमति या किसी निर्णय पर मतभेद के आधार पर महाभियोग जैसी प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।
पूर्व अटॉर्नी जनरल ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उसके कार्यों को लेकर यदि किसी पक्ष को आपत्ति है तो उसके लिए न्यायिक और संवैधानिक रास्ते उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त संवैधानिक आधार के महाभियोग की चर्चा करना उचित नहीं माना जा सकता।
उल्लेखनीय है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव आयोग के कुछ फैसलों को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। इसी क्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की चर्चाएं सामने आई हैं। हालांकि, इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों और कानूनी विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है और संवैधानिक प्रावधानों को लेकर बहस जारी है।




