तीन दिन में मांगी लंबित शिकायतों की रिपोर्ट, नौ जिलों के थानों पर गिरी गाज
उत्तर प्रदेश / etv News 24 / ब्यूरो एजेंसी लखनऊ
जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने सख्त रुख अपनाया है। जनशिकायतों के निस्तारण की समीक्षा के दौरान उन्होंने नौ जिलों के 10 थानाध्यक्षों को प्रत्यावर्तित करने और उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि शिकायतों की अनदेखी और निस्तारण में लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से हुई समीक्षा बैठक में फील्ड के पुलिस अधिकारी भी जुड़े। इस दौरान थानों और चौकियों पर लंबित जनशिकायतों की स्थिति की समीक्षा की गई। डीजीपी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे लंबित शिकायतों, उनके निस्तारण में देरी के कारणों और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की भूमिका की गहन समीक्षा करें।
खीरी से लखनऊ तक नौ जिलों के 10 थानाध्यक्ष कार्रवाई के दायरे में
डीजीपी राजीव कृष्ण ने जिन थानाध्यक्षों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए, उनमें खीरी जिले के मैलानी और फरधान, उन्नाव के सोहरामऊ, एटा के जसरथपुर, आगरा के लोहामंडी, प्रतापगढ़ के महेशगंज, बदायूं के उसावा, बिजनौर के चांदपुर, मथुरा के जैत और लखनऊ के बाबू बनारसीदास थाना प्रभारी शामिल हैं।
इन थानों में जनशिकायतों के निस्तारण में बरती गई लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए संबंधित थानाध्यक्षों को प्रत्यावर्तित करने के साथ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इस कदम को शिकायतों के प्रति जवाबदेही तय करने और पुलिस व्यवस्था में सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीन दिन में आख्या देने के निर्देश, लापरवाह पुलिसकर्मियों की भी होगी समीक्षा
डीजीपी ने सभी जनपदीय पुलिस प्रभारियों को निर्देश दिया कि वे थाना और चौकी स्तर पर लंबित जनशिकायतों की समीक्षा कर तीन दिवस के भीतर आख्या प्रस्तुत करें। रिपोर्ट में शिकायतों के लंबित रहने के कारणों के साथ लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान और उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई का विवरण भी शामिल किया जाए।
उन्होंने कहा कि जनपदीय पुलिस प्रभारी समीक्षा के बाद रेंज और जोन के माध्यम से पुलिस महानिदेशक को रिपोर्ट भेजें। शिकायतों और विवादों का समयबद्ध, निष्पक्ष एवं संवेदनशील तरीके से निस्तारण पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
प्रत्येक अधिकारी यह सुनिश्चित करे कि शिकायतकर्ता को न्यायोचित सहायता मिले और संभावित विवादों में समय रहते कार्रवाई की जाए, ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।
डीजीपी ने दो टूक कहा कि जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले थानाध्यक्षों और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।




