एमएसपी पर खरीद के दावों के बीच बाजरा किसान औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर
आधार-खतौनी में मामूली अंतर पर अटकी रजिस्ट्री, शपथपत्र के बाद भी नहीं सुधर रहीं खामियां
48 घंटे में सत्यापन पूरा करने और ऑफलाइन खरीद की व्यवस्था की मांग, आंदोलन की चेतावनी
लखनऊ उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
लखनऊ/वाराणसी। उत्तर प्रदेश में किसानों की खुशहाली के दावों के बीच फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया किसानों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रदेश अध्यक्ष, प्रबुद्ध प्रकोष्ठ ओमप्रकाश उपाध्याय ने दावा किया कि प्रदेश के करीब 40 प्रतिशत किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आधार कार्ड और खतौनी में नाम की मामूली वर्तनी संबंधी भिन्नता के चलते किसानों के आवेदन अटके हैं। शपथपत्र देने के बावजूद राजस्व कर्मियों की ओर से कमियां दूर नहीं की जा रही हैं।
उपाध्याय ने कहा कि सरकार खरीफ फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद को लेकर व्यापक प्रचार कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने बाजरा खरीद केंद्रों के समय से नहीं खुलने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसान अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य से 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल कम दाम पर बेचने को मजबूर हैं। उनके मुताबिक, बाजरे का घोषित एमएसपी 2,900 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि खरीद व्यवस्था में देरी से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
शपथपत्र के बाद भी नहीं सुधर रहीं खामियां
जदयू नेता ने कहा कि आधार कार्ड और खतौनी में नाम की मामूली भिन्नता को दूर करने के लिए किसान शपथपत्र दे रहे हैं, इसके बाद भी उनकी फार्मर रजिस्ट्री पूरी नहीं हो रही है। संबंधित लेखपालों और राजस्व कर्मियों की ओर से पोर्टल पर लंबित कमियों का निस्तारण नहीं किए जाने से किसानों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने शासन से इस समस्या का तत्काल समाधान निकालने की मांग की।
48 घंटे में सत्यापन और ऑफलाइन खरीद की मांग
ओमप्रकाश उपाध्याय ने सरकार से मांग की कि आधार और खतौनी में मामूली वर्तनी संबंधी अंतर वाले मामलों में शपथपत्र के आधार पर रजिस्ट्री को मंजूरी देने की सरल नीति बनाई जाए। सभी संबंधित राजस्व कर्मियों को 48 घंटे के भीतर लंबित सत्यापन पूरा करने का निर्देश दिया जाए। साथ ही, पोर्टल की तकनीकी खामियां दूर होने तक ऑफलाइन खरीद की वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए, ताकि किसान सरकारी खरीद के लाभ से वंचित न रहें।
उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो जदयू का प्रबुद्ध प्रकोष्ठ उनके हित में आंदोलन करेगा। इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और सरकार की होगी।
उपाध्याय ने कहा कि जदयू आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत एक नवंबर 2026 को वाराणसी के कोरोता स्थित रामलीला मैदान में राज्यस्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित करने जा रही है। पार्टी आम जनता और किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठा रही है। उन्होंने कहा कि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में न्याय के साथ विकास की अवधारणा को उत्तर प्रदेश में भी आगे बढ़ाने के लिए जदयू प्रयासरत है। किसानों की इस लड़ाई को सदन से सड़क तक उठाया जाएगा।




