करीब 2150 बूथों पर नए नाम जोड़ने और संशोधन की व्यवस्था, फिर भी नहीं पहुंच रहे लोग
एसआइआर के विरोध के बीच राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भी अभियान से रहे दूर
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश/Etv News 24/संवाददाता वागीश
आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर जिले में मतदाता पुनरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत जिले के करीब 2150 बूथों पर बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की तैनाती की गई है। शनिवार को सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक बीएलओ नए मतदाताओं के नाम सूची में शामिल कराने, छूटे हुए मतदाताओं का पंजीकरण करने और मतदाता सूची में नाम, पता सहित अन्य त्रुटियों को संशोधित कराने के लिए बूथों पर मौजूद रहे। हालांकि, अभियान को लेकर मतदाताओं में अपेक्षित उत्साह नहीं दिखाई दिया। अधिकतर बूथों पर सन्नाटा पसरा रहा और बीएलओ मतदाताओं के पहुंचने का इंतजार करते नजर आए।
मतदाता सूची में अपना नाम देखने, नया नाम जुड़वाने और गलत प्रविष्टियों में सुधार कराने के लिए लोगों की कम मौजूदगी ने अभियान की गति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की ओर से मतदाताओं को जागरूक करने और उन्हें सूची में अपना नाम जांचने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका खास असर दिखाई नहीं दे रहा है।
एसआइआर के विरोध के बीच विपक्षी कार्यकर्ताओं की गैरमौजूदगी
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर विपक्षी दलों के नेता और कार्यकर्ता लगातार विरोध जता रहे हैं। इसके बावजूद मतदाता पुनरीक्षण अभियान के दौरान बूथों पर उनकी सक्रियता भी नजर नहीं आई।
राजनीतिक रूप से सक्रिय माने जाने वाले सत्ता पक्ष और विपक्ष के कार्यकर्ताओं की दूरी ने दलों की संगठनात्मक सक्रियता पर भी सवाल खड़े किए हैं। माना जा रहा है कि संगठन के प्रति नाराजगी और राजनीतिक असंतोष भी कार्यकर्ताओं की उदासीनता की वजह हो सकता है। हालांकि, इसके स्पष्ट कारणों की पुष्टि नहीं हुई है।
डीएम की निगरानी में चुनावी तैयारियों में जुटा प्रशासन
जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह की निगरानी में प्रशासनिक महकमा आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर सक्रिय है। मतदाता सूची को दुरुस्त करने, नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने और त्रुटियों को दूर करने के लिए बूथ स्तर पर व्यवस्था की गई है। संभावित चुनाव से पहले मतदाता सूची का शुद्ध और अद्यतन होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में बूथों पर मतदाताओं की कम भागीदारी प्रशासन के लिए चुनौती बन सकती है। अभियान को प्रभावी बनाने के लिए मतदाताओं की जागरूकता और राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से वंचित न रह जाए।




