31 जुलाई 2025 को द्वितीय अपील खारिज होने से बढ़ी चिंता, रेस्टोरेशन दाखिल कराने की मांग
1930 के पट्टे से जुड़ी संपत्ति पर सैकड़ों व्यापारी कर रहे कारोबार, ईओ को सौंपा प्रार्थनापत्र
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश कुमार
शहर के मध्य स्थित गल्ला मंडी अमेठी बाड़ा और प्रतापगंज की करोड़ों रुपये की बेशकीमती संपत्ति को लेकर नगरपालिका के किरायेदार व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है। संपत्ति से जुड़े पुराने न्यायिक विवाद में हाईकोर्ट में प्रभावी पैरवी और तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर व्यापारियों ने नगरपालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी को प्रार्थनापत्र सौंपा है। व्यापारियों का कहना है कि समय रहते मुकदमे की पैरवी मजबूत नहीं हुई तो संपत्ति और उससे जुड़े कारोबारियों के हित प्रभावित हो सकते हैं।व्यापारियों के मुताबिक गल्ला मंडी की भूमि उत्तर प्रदेश शासन की नजूल संपत्ति है, जिसका वर्ष 1930 में नगरपालिका सुलतानपुर के पक्ष में पट्टा किया गया था। इसके बाद नगरपालिका ने यहां व्यापार के लिए दुकानों का आवंटन किया। वर्तमान में बड़ी संख्या में व्यापारी नगरपालिका के किरायेदार के रूप में अपनी दुकानें संचालित कर रहे हैं।पुराने मुकदमे ने फिर बढ़ाई हलचलव्यापारियों ने प्रार्थनापत्र में बताया कि संपत्ति के स्वामित्व को लेकर बिशम्भर दयाल अग्रवाल आदि बनाम राज्य उत्तर प्रदेश व नगरपालिका परिषद सुलतानपुर का दीवानी विवाद न्यायालय में चला। इसी मामले से संबंधित नगरपालिका की द्वितीय अपील संख्या 608/83, नगरपालिका सुलतानपुर आदि बनाम बिशम्भर दयाल अग्रवाल आदि भी न्यायालय में लंबित रही।व्यापारियों का दावा है कि उक्त द्वितीय अपील 31 जुलाई 2025 को अधिवक्ता की अनुपस्थिति के कारण अदम पैरवी में खारिज हो गई। इसके बाद व्यापारियों ने नगरपालिका से मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल रेस्टोरेशन प्रार्थनापत्र दाखिल कराने और हाईकोर्ट में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित कराने की मांग की है।’करोड़ों की संपत्ति, लापरवाही की गुंजाइश नहीं’व्यापारियों का कहना है कि मामला केवल जमीन अथवा दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे नगरपालिका की बेशकीमती संपत्ति और वर्षों से कारोबार कर रहे सैकड़ों व्यापारियों के हित जुड़े हैं। ऐसे में न्यायालय में लंबित मामले की पैरवी में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं होनी चाहिए।प्रार्थनापत्र में अधिशासी अधिकारी से मांग की गई है कि हाईकोर्ट में नियुक्त अधिवक्ता के माध्यम से आवश्यक रेस्टोरेशन कार्रवाई तत्काल कराई जाए। साथ ही मामले की प्रत्येक न्यायिक कार्यवाही पर निगरानी रखते हुए नगरपालिका के हितों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाए।व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि गल्ला मंडी की संपत्ति से जुड़े अभिलेखों और न्यायिक प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध कानूनी कदम उठाए जाएं, जिससे संपत्ति के अधिकारों के साथ-साथ नगरपालिका के किरायेदार व्यापारियों के व्यवसायिक हित भी सुरक्षित रह सकें।




