2027 से पहले सपा के PDA समीकरण पर निगाह
2020 का राज्यसभा चुनाव फिर चर्चा में, तब भाजपा ने नहीं उतारा था नौवां प्रत्याशी
बसपा के रामजी गौतम पहुंचे थे उच्च सदन
लखनऊ उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश कुमार
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस संभावना को लेकर है कि क्या भारतीय जनता पार्टी अपने संभावित कोटे में से एक सीट पर बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती को समर्थन देकर उन्हें राज्यसभा में भेजने का रास्ता आसान कर सकती है। हालांकि, अभी भाजपा की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।इस चर्चा के केंद्र में 2020 का राज्यसभा चुनाव भी है। उस समय उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा ने आठ प्रत्याशी उतारे थे। संख्या बल के आधार पर भाजपा के पास नौवां प्रत्याशी उतारने की गुंजाइश थी, लेकिन पार्टी ने नौवां उम्मीदवार नहीं उतारा। इसके बाद बसपा के रामजी गौतम राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे। समकालीन रिपोर्टों में उनके निर्वाचन में भाजपा के समर्थन का उल्लेख किया गया था।अब 2026 में एक बार फिर वही राजनीतिक घटनाक्रम चर्चा में है। वजह यह भी है कि मौजूदा विधानसभा संख्या बल के लिहाज से बसपा के पास उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सीट जीतने के लिए पर्याप्त विधायक नहीं हैं। ऐसे में यदि भाजपा समर्थन करती है तो यह मायावती के लिए उच्च सदन में प्रतिनिधित्व बनाए रखने का महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर हो सकता है।
2027 के लिए दलित समीकरण पर भी निगाह
राज्यसभा का यह संभावित घटनाक्रम केवल उच्च सदन तक सीमित नहीं माना जा रहा। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में दलित मतदाताओं को लेकर सभी प्रमुख दल अपनी-अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण को राजनीतिक आधार बनाने पर जोर देते रहे हैं।ऐसे में यदि भाजपा और बसपा के बीच राज्यसभा के स्तर पर किसी तरह का सहयोग सामने आता है तो उसके राजनीतिक संदेश और संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा स्वाभाविक रूप से तेज होगी। हालांकि, इसे सीधे तौर पर किसी गठजोड़ या चुनावी समझौते का संकेत मानना फिलहाल जल्दबाजी होगी।बसपा प्रमुख मायावती पहले ही 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी के अकेले मैदान में उतरने की घोषणा कर चुकी हैं। ऐसे में राज्यसभा चुनाव में संभावित समर्थन और विधानसभा चुनाव की रणनीति—दोनों को अलग-अलग राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखना होगा।फिलहाल निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा और अन्य दल अपने प्रत्याशियों के नाम कब घोषित करते हैं। उम्मीदवारों के ऐलान के बाद ही साफ होगा कि 2020 के घटनाक्रम की पुनरावृत्ति होती है या इस बार उत्तर प्रदेश की सियासत कोई नया समीकरण देखती है।




