जाट समाज और चौधरी चरण सिंह के अपमान का आरोप, 2027 से पहले सपा-रालोद की सियासी तल्खी बढ़ी
जयंत बोले- अहंकार का आचरण सिर्फ पतन लाता है, पश्चिमी यूपी में फिर गरमाई गठबंधन की सियासत
लखनऊ उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश कुमार
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के बीच सियासी तकरार एक बार फिर तेज हो गई है। अखिलेश यादव के हालिया बयान पर जयंत चौधरी ने तीखा पलटवार करते हुए बिना नाम लिए निशाना साधने की राजनीति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि राजनीतिक लड़ाई में कुछ कहना ही था तो उनका नाम लेकर कहा जाता। साथ ही चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि उन्होंने पुराने राज खोलने शुरू कर दिए तो अखिलेश यादव के लिए मुंह दिखाने की जगह नहीं बचेगी।दरअसल, अखिलेश यादव ने हाल में बिना किसी का नाम लिए तंज कसते हुए कहा था कि जाने कहां-कहां से लोग गठबंधन बनाने आए थे। हमने चवन्नी का रुपया बना दिया था, इसके बावजूद हमें छोड़कर चले गए।
अखिलेश के इस बयान को जयंत चौधरी पर सीधा निशाना माना जा रहा है। इसकी वजह 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान जयंत का वह बयान भी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह चवन्नी नहीं हैं जो पलट जाएं।अखिलेश के तंज के बाद जयंत चौधरी ने एक्स पर मोर्चा खोलते हुए कहा कि सियासत की लड़ाई में अगर कुछ सस्ते शब्द बोलने ही थे तो उनका नाम लेकर बोल देते। उन्होंने जाट समाज को निशाना बनाए जाने और ‘एबीसीडी हमने सिखाई’ जैसे कथित बयानों पर भी आपत्ति जताई। जयंत ने कहा कि वह इस अहंकार को करीब से देख चुके हैं और उनका मानना है कि ऐसा आचरण सिर्फ राजनीतिक पतन की ओर ले जाता है।
जयंत चौधरी ने इस पूरे प्रकरण को किसान नेता चौधरी चरण सिंह और जाट समाज के सम्मान से भी जोड़ दिया। रालोद की ओर से आरोप लगाया गया कि अखिलेश यादव का बयान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट बनाम गैर-जाट की राजनीतिक खाई को हवा देने की कोशिश है। इससे दोनों दलों के बीच पुराने गठबंधन की तल्ख यादें भी फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गई हैं।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी गर्मी
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होने के साथ ही सपा और रालोद के बीच राजनीतिक दूरी का असर बयानबाजी में भी दिखाई देने लगा है। पश्चिमी यूपी में जाट मतदाताओं की भूमिका को देखते हुए दोनों नेताओं की यह भिड़ंत महज व्यक्तिगत बयानबाजी तक सीमित नहीं मानी जा रही। अखिलेश यादव के तंज के जवाब में जयंत चौधरी के आक्रामक तेवरों ने आने वाले दिनों में पश्चिमी यूपी की सियासत और गठबंधन समीकरणों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।




