27,407 मेगावाट तक पहुंची बिजली की मांग, रात में कटौती से गांव-कस्बों के उपभोक्ता परेशान
कोयला खदानों में जलभराव ने बढ़ाई मुश्किल, विपक्ष उठा सकता है सरकार की बिजली व्यवस्था पर सवाल
लखनऊ उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/ संवाददाता वागीश कुमार
त्योहारों से ठीक पहले उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति को लेकर संकट गहराता दिखाई दे रहा है। उत्पादन इकाइयों के बंद होने और कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने से बिजली उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदेश में 13 उत्पादन इकाइयों के बंद रहने से करीब 5,940 मेगावाट उत्पादन प्रभावित हुआ है। वहीं 14 सितंबर को बिजली की अधिकतम मांग 27,407 मेगावाट दर्ज की गई। भारी बारिश के कारण कोयला खदानों में जलभराव और कोयले के उत्पादन व परिवहन में आई बाधा को संकट की प्रमुख वजह बताया जा रहा है। इसके अलावा कुछ उत्पादन इकाइयों के तकनीकी कारणों से बंद रहने से भी उपलब्धता प्रभावित हुई है। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अनुसार रात के पीक आवर में बिजली की उपलब्धता कम होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों, बुंदेलखंड, तहसील मुख्यालयों और नगर पंचायतों में सीमित रोस्टरिंग करनी पड़ रही है।
18 घंटे के रोस्टर बनाम जमीन पर कटौती का सवाल
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धारित आपूर्ति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विभिन्न रिपोर्टों में कई इलाकों में रात के समय कई घंटे कटौती की बात सामने आई है। वहीं बिजली विभाग का कहना है कि दिन में आपूर्ति सामान्य रखने और निर्धारित रोस्टर का पालन कराने का प्रयास किया जा रहा है। जिला मुख्यालयों को निर्बाध आपूर्ति देने की बात भी विभाग की ओर से कही गई है।
राजनीतिक असर भी संभव बिजली संकट का मुद्दा त्योहारों से पहले राजनीतिक रूप से भी गरमा सकता है
विपक्षी दल सरकार की बिजली आपूर्ति के दावों और ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही कटौती को लेकर सवाल उठा सकते हैं। हालांकि, मौजूदा संकट की वजह कोयला खदानों में बारिश और जलभराव से आपूर्ति प्रभावित होना तथा उत्पादन इकाइयों का बंद रहना बताया गया है। इसलिए राजनीतिक आरोपों और प्रशासनिक तथ्यों को अलग-अलग देखना जरूरी होगा।ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल के अनुसार स्थिति में दो से तीन दिन में सुधार की उम्मीद है। अनपरा-डी, हरदुआगंज-ई और जवाहरपुर की इकाइयों के दोबारा चलने तथा कोयले की उपलब्धता सुधरने से करीब 2,200 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होने की उम्मीद जताई गई है। फिलहाल रात में करीब 2,000 से 3,000 मेगावाट तक की कटौती की जानकारी सामने आई है।
त्योहारों के दौरान बढ़ सकती है चुनौती
गणेश उत्सव, नवरात्र और अन्य त्योहारों के दौरान बिजली की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में बंद इकाइयों को जल्द चालू करना और कोयले की नियमित आपूर्ति बनाए रखना बिजली विभाग के लिए बड़ी चुनौती होगी। सरकार और पावर कारपोरेशन के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उत्पादन में आई कमी को कितनी जल्दी पूरा किया जाता है और त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति किस तरह सुनिश्चित की जाती है।




