निषाद आरक्षण से जातिगत जनगणना तक उठाए सवाल, बोले- वादों से मुकर गई भाजपा
इंकाउंटर और बुलडोजर कार्रवाई पर भी सरकार को घेरा, कहा- जाति देखकर हो रहा न्याय
लखनऊ उत्तर प्रदेश/Etv News 24/संवाददाता वागीश कुमार
उत्तर प्रदेश के लखनऊ/देवरिया बरहज विधानसभा क्षेत्र के तेलियाकलां और सलेमपुर विधानसभा क्षेत्र के रूपनछपरा में आयोजित पीडीए जनचौपाल एवं निषाद संवाद सम्मेलन में निषाद समाज के मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार पर जमकर राजनीतिक हमला बोला गया। समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौधरी लौटन राम निषाद ने कहा कि सपा ने निषाद समाज को मान-सम्मान, पहचान और अधिकार देने का काम किया, जबकि भाजपा सरकार ने इन अधिकारों को छीन लिया।
तेलियाकलां में कार्यक्रम की अध्यक्षता सपा जिलाध्यक्ष व्यासजी यादव ने की। विधानसभा अध्यक्ष रामबहादुर यादव और सुरेश साहनी की मौजूदगी में हुए कार्यक्रम में चौधरी लौटन राम निषाद ने कहा कि निषाद समाज के नाम पर राजनीति करने वाले नेताओं ने अपने परिवार के हित को प्राथमिकता देकर समाज को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चुनाव के समय ही निषाद आरक्षण और समाज के साथ हो रहे अन्याय के मुद्दे याद आते हैं।
आरक्षण और जातिगत जनगणना पर भाजपा को घेरा
लौटन राम निषाद ने कहा कि पश्चिम बंगाल, दिल्ली और ओडिशा में निषाद समाज से जुड़ी कुछ जातियों को अनुसूचित जाति का लाभ मिल रहा है, तो उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में निषाद, मल्लाह, केवट, बिंद और गोंडिया जैसी जातियों को यह अधिकार क्यों नहीं मिल रहा। उन्होंने केंद्र सरकार से जातिगत जनगणना कराने तथा जनगणना-2027 के प्रपत्र में ओबीसी का अलग कॉलम शामिल करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि जब देश में पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों तक की गणना होती है तो पिछड़े वर्गों की वास्तविक संख्या जानने के लिए जातिगत गणना कराने से परहेज क्यों किया जा रहा है। उन्होंने सरकारी उपक्रमों और संस्थानों के निजीकरण को पिछड़े, दलित और वंचित वर्गों के हितों के खिलाफ बताते हुए कहा कि इससे आरक्षण और प्रतिनिधित्व पर भी असर पड़ रहा है।
निषाद आरक्षण और पुश्तैनी अधिकारों का मुद्दा गरमाया
सपा नेता ने भाजपा के पुराने वादों और मछुआरा दृष्टि पत्र का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि निषाद समाज से किए गए वादों का क्या हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के समय निषाद समाज के आरक्षण संबंधी प्रस्ताव।




