मेजरगंज में पहली बार स्थापित हुई पुणे के दगडूसेठ हलवाईगणपति की प्रतिमा
दस दिन तक गूंजेगा गणपति बप्पा मोरया
पूजा-अर्चना और भंडारे का चलेगा दौर
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश कुमार
सुल्तानपुर मे गणेश चतुर्थी को लेकर शहर में उत्साह और उल्लास का माहौल है। शनिवार देर रात विभिन्न स्थानों पर बनाए गए पंडालों में गणपति बप्पा की प्रतिमाएं गाजे-बाजे के साथ पहुंचीं। श्रद्धालुओं ने जयकारों के बीच प्रतिमाओं का स्वागत किया। सोमवार से विधिवत गणेशोत्सव का शुभारंभ होगा। दस दिनों तक शहर के विभिन्न पंडालों में पूजा-अर्चना, धार्मिक कार्यक्रम और भंडारे का आयोजन किया जाएगा।चौक से सटे मेजरगंज में इस बार पहली बार पुणे के प्रसिद्ध श्रीमंत दगडूसेठ हलवाई गणपति की प्रतिमा स्थापित की गई है। करीब पांच फीट ऊंची प्रतिमा पुणे से मंगाई गई है। समिति के अनुसार प्रतिमा की लागत करीब 45 हजार रुपये है। प्रतिमा को पंडाल तक ले जाते समय गभड़िया ओवरब्रिज के पास कुछ देर के लिए जाम की स्थिति भी बनी। हालांकि, प्रतिमा के पंडाल में पहुंचते ही श्रद्धालुओं में उत्साह दिखाई दिया।श्री प्रथम गणेश पूजा समिति के अध्यक्ष सिद्धू काले ने बताया कि गणेशोत्सव के दौरान प्रतिदिन सुबह नौ बजे और शाम आठ बजे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। आयोजन में मराठी समाज के लोग भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे। समिति की ओर से धार्मिक कार्यक्रमों के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
1974 में शुरू हुई थी परंपरासुल्तानपुर में गणेशोत्सव की शुरुआत वर्ष 1974 में महाराष्ट्र से आए बालकृष्ण पुजारी ने मेजरगंज में की थी। धीरे-धीरे यह परंपरा शहर के अन्य हिस्सों तक पहुंच गई। वर्तमान में राहुल चौराहा, शास्त्री नगर, विवेक नगर और गोलाघाट समेत कई स्थानों पर गणपति की प्रतिमाएं स्थापित कर गणेशोत्सव मनाया जाता है।दस दिवसीय गणेशोत्सव के दौरान शहर में धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का दौर चलेगा। अंतिम दिन श्रद्धालु गाजे-बाजे और जयकारों के साथ गणपति बप्पा को विदाई देंगे। सीताकुंड घाट पर प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। इसको लेकर आयोजकों और श्रद्धालुओं में अभी से तैयारियां तेज हो गई हैं।




