करगहर रोहतास/Etv News 24
प्रखंड के बसतलवा उत्क्रमित मध्य विद्यालय में पदस्थापित प्रधानाध्यापिका की फर्जी प्रमाण पत्रों के विरुद्ध निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के मामले में नया मोड़ तब आ गया जब एच एम ने कागजातों को सही ठहरते हुए पुनः संबंधित विश्वविद्यालय से जांच की मांग की है । इस संबंध में एच एम अर्चना सिंह ने बताया कि प्रखंड नियोजन समिति द्वारा उनकी नियुक्ति वर्ष 2012 में की गई थी । तब से 2026 तक कई बार प्रदेश के सभी शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन शैक्षणिक संस्थानों से किया गया । जिसमें मेरा प्रमाण पत्र वैध व सही पाया गया । लेकिन निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के सत्यापन के दौरान प्रमाण पत्र में कौन सी ऐसी त्रुटि पाई गई कि उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया गया और नहीं व्यक्तिगत पूछताछ की गई । उल्टे भावना से ग्रसित होकर उनके विरुद्ध यह कार्रवाई की गई । उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा फर्जी कागजातों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों को स्वेच्छा से त्यागपत्र देने के लिए एमनेस्टी पीरिएड की समय सीमा निर्धारित की गई थी। इस दौरान प्रदेश के सभी शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की गहनता से जांच की गई थी । उन्होंने इस मामले को बेबुनियाद बताते हुए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से पुनः प्रमाण पत्रों का सत्यापन करने मांग की है । उन्होंने बताया कि प्रमाण पत्रों की पुनः जांच नहीं की गई तो वे न्यायालय का शरण लेनी।



